कभी नहीं लेना चाहिए अख़बार में लिपटा खाना, FSSAI ने बताई हैरान करने वाली वजह

Food Wrapped In Newspaper: भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के अनुसार खानपान की चीजों को अखबार में नहीं लपेटना चाहिए, यहां तक कि खाना अख़बार से ढकना भी नहीं चाहिए. यहां जानिए इस नियम के पीछे क्या है कारण.

Wrapping food in newspaper ink
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Wrapping food in newspaper ink

Wrapping Food In Newspaper FSSAI: भारत में ठेले वगैरह या फिर बहुत सी दुकानों पर भी खाने की चीजें अख़बार पर लपेटकर दी जाती हैं. अख़बार के खोके तैयार किए जाते हैं और उनमें भेल, तली हुई पूड़ी, कचौड़ी, पकौडे, रोटी या मिठाइयां डालकर दी जाती हैं. लेकिन, भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) का कहना है अख़बार में लपेटा हुआ खाना खाना आपकी सेहत को एक नहीं बल्कि कई तरह से प्रभावित कर सकता है. जानिए मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेल्फेयर की प्रेस रिलीज में इस बारे में क्या कहा गया है.

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अख़बार में खाना लपेटकर क्यों नहीं खाना चाहिए

अख़बार में खाना लपेटकर क्यों नहीं खाना चाहिए 2 / 7

FSSAI के अनुसार, अख़बार की स्याही में केमिकल्स, पिग्मेंट्स, बाइंडर्स और कलरेंट्स होते हैं जो खाने में जाते हैं और स्वास्थ्य बिगाड़ने वाले साबित होते हैं. छपाई के लिए इस्तेमाल होने वाली स्याही में लेड और हैवी मेटल्स होते हैं जो लॉन्ग टर्म दिक्कतों की वजह बन सकते हैं.

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हार्मफुल पैथोजेन्स का खतरा

हार्मफुल पैथोजेन्स का खतरा 3 / 7

जिस अख़बार में खाना लपेटा जाता है उसमें मिट्टी, गंदगी, प्रिंटिंग के द्वारा जमी गंदगी, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रिब्यूशन के दौरान अनेक सतहों के संपर्क में आने पर हार्मफुल पैथोजेन्स चिपके होते हैं. यही खाने में भी लग सकते हैं.

इन कामों के लिए भी नहीं कर सकते अख़बार का इस्तेमाल

इन कामों के लिए भी नहीं कर सकते अख़बार का इस्तेमाल 4 / 7

साल 2018 के FSSAI के नियमों के अनुसार, खाना लपेटने के साथ ही समोसे, वड़ा पाव या पकौड़े जैसे फूड्स का तेल सोखने के लिए भी अख़बार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. दुकानदार पका हुआ खाना ढकने के लिए भी अख़बार का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं.

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इन सभी को किया गया है मना

इन सभी को किया गया है मना 5 / 7

FSSAI ने फूड बिजनेस चलाने वालों, ठेले वालों, क्लाउड किचन वालों, केटरर, क्विक सर्विस रेस्टॉरेंट्स, फूड स्टॉल या छोटे रिटेलर्स को भी अख़बार का खाना लपेटने या ढकने से मना किया है.

अख़बार नहीं तो किस चीज का करें इस्तेमाल

अख़बार नहीं तो किस चीज का करें इस्तेमाल 6 / 7

खाने को ढकने या लपेटने के लिए अख़बार के बजाय फूड ग्रेड पेपर, बटर पेपर या किसी और बेहतर ऑप्शन को चुना जा सकता है.

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ग्राहक करें यह काम

ग्राहक करें यह काम 7 / 7

ग्राहकों को अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए खाने की उन चीजों को खरीदना ही नहीं चाहिए जिन्हें अख़बार में लपेटकर दिया जा रहा है. फूड ग्रेड पेपर, फूड रैपिंग पेपर या बटर पेपर पर लिपटा हुआ खाना ही खरीदें. यह भी पढ़ें - अश्वगंधा के पत्तों पर FSSAI ने लगाया बैन, दवा या खानपान में सिर्फ एक हिस्से का हो सकेगा इस्तेमाल अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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