अच्छी नींद के लिए कौन से सूखे मेवे खाने चाहिए? जानिए कौन से Dry Fruits चैन से सोने में करेंगे मदद

Dry Fruits For Better Sleep: क्या आप जानते हैं ऐसे कुछ सूखे मेवे हैं जो आपको अच्छी नींद लेने में मदद कर सकते हैं. इन सूखे मेवों को आप अपनी डेली डाइट का हिस्सा बना सकते हैं.

Neend lane ke liye kya khaye
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Neend lane ke liye kya khaye

Dry Fruits For Sleep: सूखे मेवे खाने में तो स्वादिष्ट होते ही हैं साथ ही सेहत के लिए भी बेहद अच्छे होते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं यही सूखे मेवे आपकी नींद की दिक्कतों को दूर कर सकते हैं और नींद नहीं आती है तो बेहतर नींद लाने में मददगार हो सकते हैं. ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें रात के समय चैन की नींद लेने में दिक्कत महसूस होती है. कभी इस करवट तो कभी उस करवट करते रहने पर भी नींद नहीं आती है. ऐसे में यहां बताए गए सूखे मेवे बेहतर नींद लेने में असरदार साबित हो सकते हैं.

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सूखे मेवे खाने से कैसे आती है अच्छी नींद

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सूखे मेवों से शरीर ऐसे हार्मोन और तत्व मिलते हैं जो अच्छी नींद लाने में मदद करते हैं. सूखे मेवे मेलाटॉनिन यानी स्लीप हार्मोन के प्रोडक्शन में मदद करते हैं, सेरोटॉनिन और ट्रिप्टोफेन का प्रोडक्शन बेहतर करते हैं और साथ ही मैग्नीशियम देते हैं. इससे चैन की नींद लेने में मदद मिलती है.

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अखरोट

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अच्छी नींद पाने के लिए अखरोट खाए जा सकते हैं. अखरोट से मेलाटॉनिन लेवल्स बढ़ते हैं, इसमें मौजूद अमीनो एसिड्स सेरोटॉनिन और मेलाटॉनिन के प्रोडक्शन को बढ़ाते हैं. ऐसे में सोने से 3 घंटे पहले अखरोट खाया जा सकता है.

काजू

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सोने से 1-2 घंटे पहले काजू खाएं. काजू ट्रिप्टोफेन से भरपूर होते हैं, इनसे मैग्नीशियम मिलता है और इसमें मौजूद हेल्दी मोनोसैचुरेटेड फैट्स पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखते हैं जिससे रात में भूख से नींद नहीं खुलती है.

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बादाम

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बादाम मेलाटॉनिन के प्रोडक्शन में मददगार होता है. इन्हें खाने पर अच्छी नींद आ सकती है. इसीलिए सोने से 2 घंटे पहले मुट्ठीभर बादाम खाए जा सकते हैं. कोशिश करें कि कच्चे या भीगे हुए बादाम खाएं, सॉल्टेड या शुगर कोटेड नहीं.

खजूर

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मैग्नीशियम और पौटेशियम से भरपूर खजूर खाने पर मसल्स रिलैक्स होती हैं. ऐसे में दूध के साथ खजूर लिया जाए तो अच्छी नींद आती है.

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सूखी चेरीज

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सूखी चेरीज या टार्ट चेरीज एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं. इनसे शरीर को अच्छी मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स मिलते हैं. इससे भी ज्यादा इसमें मेलाटॉनिन होता है जो नींद लाने में मददगार है.

प्रून्स

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प्रून्स स्लीप सपोर्टर की तरह काम करते हैं. इनमें मेलाटॉनिन होता है, इन्हें खाने पर मिनरल बैलेंस होता है और गट को भी फायदा मिलता है. सोने से पहले प्रून्स खाए जाएं तो स्लीप क्वालिटी बेहतर होती है. यह भी पढ़ें - कौन सा कैंसर त्वचा में खुजली का कारण बन सकता है? जानिए यह किस Cancer का लक्षण है अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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