पिरामिड कैसे बने थे? नई थ्योरी खोल सकती है राज, इस तरह ऊपर लाए गए थे विशालकाय पत्थर

How Did They Built The Pyramids: पिरामिड का निर्माण किस तरह से हुआ था इसपर अलग-अलग थ्योरी पेश की जाती हैं, लेकिन हालिया थ्योरी शायद सच हो सकती है. ऐसे में क्या आखिर खुल जाएगा ग्रेट पिरामिड का रहस्य?

The Great Pyramid of Giza
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The Great Pyramid of Giza

The Great Pyramid of Giza: गीजा का ग्रेट पिरामिड मिस्र के काहिरा में स्थित है. यह प्राचीन विश्व के सात अजूबों में से एक है. विशालकाय पत्थरों से निर्मित यह पिरामिड हमेशा से लोगों के बीच रहस्य का विषय बना हुआ है. देखा जाए तो दुनिया का सबसे बड़ा रहस्य तो यही है कि आखिर गीजा के पिरामिड को कैसे बनाया गया था. पिरामिड जिन विशालकाय पत्थरों से निर्मित है उन्हें कोई इंसान उठा नहीं सकता है और पिरामिड की ऊंचाई तक बिना किसी उपकरण के इन पत्थरों को लेकर नहीं जाया जा सकता हैं. वहीं, आज से 4,600 साल पहले इन पिरामिड को बनाया गया था जब आधुनिक मशीनें भी उपलब्ध नहीं थीं. ऐसे में इन पिरामिड की मिस्ट्री शायद अब सुलझ सकती है.

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क्या एलियंस ने बनाए थे पिरामिड

क्या एलियंस ने बनाए थे पिरामिड 2 / 6

पिरामिड कैसे बनाए गए थे इसपर अलग-अलग तरह के तर्क और सिद्धांत दिए जाते हैं. आम लोग इसे दूसरी दुनिया के एलियंस का काम बताते हैं तो वहीं, वैज्ञानिक मानते हैं कि किसी तरह का रैंप बनाकर पत्थरों को इतनी ऊंचाई तक लेकर जाया गया है.

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दी गईं ये थ्योरी

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पिरामिड को रैंप की मदद से बनाए जाने के सिद्धांत को कई बार खारिज किया गया है क्योंकि रैंप के कोई साक्ष्य अबतक नहीं मिले हैं और ना ही नदी के आस-पास किसी रैंप के होने के तथ्यों को सही बताया गया है.

कंप्यूटर साइंटिस्ट ने पेश की नई थ्योरी

कंप्यूटर साइंटिस्ट ने पेश की नई थ्योरी 4 / 6

हाल ही में कंप्यूटर साइंटिस्ट Vicente Luis Rosell Roig ने पिरामिड को एनालाइज किया और नई थ्योरी पेश की है. रोजेल का कहना है कि पिरामिड के बाहर नहीं बल्कि पिरामिड पर ही रैंप्स का निर्माण किया गया था जिससे विशालकाय पत्थरों को खींचा गया और ऊपर लेकर जाया गया.

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क्यों विश्वास करने योग्य है यह थ्योरी

क्यों विश्वास करने योग्य है यह थ्योरी5 / 6

पिरामिड का एक पत्थर लगभग 2267 किलोग्राम भारी है. ऐसे में पिरामिड के चारों तरफ स्पाइरल रैंप की थ्योरी विश्वास करने योग्य साबित होती है. इजिप्टोलॉजिस्ट भी इस थ्योरी पर विश्वास करते हैं और मानते हैं कि इस स्पाइरल रैंप से पिरामिड का निर्माण किया जाना संभव हो सकता है.

क्या खुल गया पिरामिड का रहस्य

क्या खुल गया पिरामिड का रहस्य 6 / 6

रोजेल रॉइग का कहना है कि अगर पिरामिड पर घुमावदार रैंप यानी स्पाइरल रैंप बना होगा तो इसे ऊपर से नीचे तक पत्थरों से ढक दिया गया होगा और इसी वजह से पिरामिड के आस-पास अलग से किसी रैंप के साक्ष्य नहीं मिले. ऐसे में हो सकता है कि यह थ्योरी आखिरकार सच साबित हो और इसी तरह मिस्त्र के लोगों ने पिरामिड का निर्माण किया हो. यह भी पढ़ें - माउंट एवरेस्ट का असली नाम क्या है? क्या आप जानते हैं Mount Everest को हिंदी में क्या कहते हैं

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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