आज ही के दिन लगी थी दुनिया की पहली इलेक्ट्रिक ट्रैफिक लाइट, जानें भारत में सबसे पहले कहां हुआ था इस्तेमाल
आपने सड़कों पर ट्रैफिक लाइट जरूर देखेंगी होंगी, जो वाहनों को बिना किसी परेशानी यात्रा करने में मदद करती है, लेकिन क्या आप ये जानते हैं इसका इस्तेमाल सबसे पहले कहां हुआ था?

आज शहरों के हर बड़े चौराहे पर दिखने वाली लाल, पीली और हरी बत्तियां यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने में बड़ी अहम भूमिका निभाती हैं. इनके संकेत से वाहन रुकते हैं, चलते हैं और सड़क पर अनुशासन बना रहता है. लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर दुनिया और भारत में सबसे पहले इसका इस्तेमाल कहां हुआ?
दुनिया की पहली इलेक्ट्रिक ट्रैफिक लाइट कहां लगी
2 / 7दुनिया की पहली इलेक्ट्रिक ट्रैफिक सिग्नल लाइट 5 अगस्त 1914 को अमेरिका के क्लीवलैंड शहर में लगाई गई थी. यह ट्रैफिक कंट्रोल की दिशा में एक बड़ा कदम था, जिसने सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद की.
पहली ट्रैफिक लाइट में नहीं थी पीली बत्ती
3 / 7शुरुआत में इलेक्ट्रिक ट्रैफिक लाइट सिस्टम में सिर्फ दो ही रंग थे, इसमें लाल और हरा रंग शामिल था. इसके साथ एक बजर भी लगाया गया था, जो सिग्नल बदलने से पहले लोगों लाइट बदलने का संकेत देता था.
1920 में शामिल हुआ पीले रंग का सिग्नल
4 / 7ट्रैफिक व्यवस्था को और आसान बनाने के लिए साल 1920 में लाल और हरे सिग्नल के बीच पीली लाइट को जोड़ा गया. इसके बाद वाहन चालकों को रुकने और चलने के बीच तैयारी का समय मिलने लगा.
ऑटोमेटिक टाइमर से आसान हुआ ट्रैफिक कंट्रोल
5 / 7इतना ही नहीं, इसे और बेहतर बनाने के लिए साल 1922 के बाद कई जगह ट्रैफिक सिग्नल को ऑटोमेटिक टाइमर की मदद से कंट्रोल किया जाने लगा. इससे ट्रैफिक पुलिस पर निर्भरता कम हुई और चौराहों पर वाहनों की आवाजाही ज्यादा बेहतर तरीके से होने लगी.
भारत में पहली बार कहां हुआ इसका इस्तेमाल
6 / 7भारत में इलेक्ट्रिक ट्रैफिक सिग्नल की शुरुआत साल 1953 में चेन्नई शहर से हुई थी. यहां इसे बढ़ते ट्रैफिक को कंट्रोल करने और सड़क हादसों को कम करने के उद्देश्य से लगाया गया था.
चेन्नई के बाद बेंगलुरु में पहुंची ट्रैफिक लाइट
7 / 7चेन्नई में ये सिग्नल सफल रहा, जिसके करीब 10 साल बाद बेंगलुरु में भी इलेक्ट्रिक ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए. धीरे-धीरे देश के अन्य बड़े शहरों में भी ट्रैफिक लाइट की सुविधा को पहुंचाया गया और आज हर राज्य के हर शहर में ये ट्रैफिक लाइट्स मौजूद है. यह भी पढ़ें: IRCTC Tour Package: कम खर्च में घूमें गंगटोक, कालिम्पोंग और दार्जिलिंग, रहना-खाना सब पैकेज