सेफ्टी पिन में क्यों होता है छोटा छेद? केवल डिजाइन नहीं, ये है इसका प्रयोग

अगर आप महिला हैं तो तो सेफ्टी पिन का रोज प्रयोग करते हैं, लेकिन अगर पुरुष हैं तो कभी न कभी कुछ फंसे हुए काम को पूरा करने के लिए सेफ्टी पिन का प्रयोग किया ही होगा। लेकिन कभी आपने पिन के नीचे छोटे से छेद को नोटिस किया है। अगर किया भी होगा तो महज डिजाइन समझा होगा लेकिन ऐसा नहीं है। क्या है पूरी कहानी, आइए बताते हैं...

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खास बनावट

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  सेफ्टी पिन का डिजाइन अनोखा और वैज्ञानिक है। इसमें पीछे एक छोटा छेद होता है जो स्प्रिंग का काम करता है। यही स्प्रिंग तनाव बनाकर पिन को कसकर बंद रखता है। पिन के दो हिस्से हैं, और दोनों मिलकर इसे सुरक्षित बनाते हैं।

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गोलाकार स्प्रिंग

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नीचे का गोलाकार स्प्रिंग (The Spring)पिन के नीचे तार को मोड़कर एक छल्ला बनाया जाता है। ये सिर्फ डिजाइन नहीं, असली स्प्रिंग है। ये तनाव पैदा करता है जिससे पिन का नुकीला सिरा ऊपर खांचे में कसकर फंसा रहता है। बिना इस तनाव के पिन बार-बार खुल जाएगी और चुभ सकती है।

ऊपर का गार्ड

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ऊपर का गार्ड (The Head/Guard)ये वो हिस्सा है जहां पिन का नुकीला सिरा बंद होकर सुरक्षित रहता है। इसी की वजह से पिन बंद रहती है और आप चुभने से बचते हैं।

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सेफ्टी पिन का आविष्कार

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सेफ्टी पिन के बनने की कहानीशायद आपने कभी सोचा न हो कि आज जो सेफ्टी पिन हम इस्तेमाल करते हैं, उसे कब और किसने बनाया। आज वाली सेफ्टी पिन का आविष्कार वॉल्टर हंट ने 1849 में किया था। उन्होंने तार के एक टुकड़े को मोड़कर ये स्प्रिंग वाला सिस्टम बनाया, जो आज भी इस्तेमाल होता है।

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लेखक के बारे में

Raghav Tiwari

Raghav Tiwari

राघव तिवारी न्यूज24 में शिफ्ट हेड की भूमिका निभा रहे हैं। यहां टीम प्रबंधन के साथ नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि की खबरें भी कवर करते हैं। इससे पहले ये अमर उजाला, नईदुनिया, नवभारत टाइम्स (NBT) और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में रिपोर्टिंग कर चुके हैं। देवभूमि उत्तराखंड, इंदौर, नोएडा, कानपुर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में काम करने की वजह से राघव भिन्न-भिन्न कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत की समझ रखते हैं। राघव तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी की है। शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Mail ID: raghav.tiwari@bagconvergence.in Contact No. 8840671098
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