सेफ्टी पिन में क्यों होता है छोटा छेद? केवल डिजाइन नहीं, ये है इसका प्रयोग
अगर आप महिला हैं तो तो सेफ्टी पिन का रोज प्रयोग करते हैं, लेकिन अगर पुरुष हैं तो कभी न कभी कुछ फंसे हुए काम को पूरा करने के लिए सेफ्टी पिन का प्रयोग किया ही होगा। लेकिन कभी आपने पिन के नीचे छोटे से छेद को नोटिस किया है। अगर किया भी होगा तो महज डिजाइन समझा होगा लेकिन ऐसा नहीं है। क्या है पूरी कहानी, आइए बताते हैं...

खास बनावट
2 / 5सेफ्टी पिन का डिजाइन अनोखा और वैज्ञानिक है। इसमें पीछे एक छोटा छेद होता है जो स्प्रिंग का काम करता है। यही स्प्रिंग तनाव बनाकर पिन को कसकर बंद रखता है। पिन के दो हिस्से हैं, और दोनों मिलकर इसे सुरक्षित बनाते हैं।
गोलाकार स्प्रिंग
3 / 5नीचे का गोलाकार स्प्रिंग (The Spring)पिन के नीचे तार को मोड़कर एक छल्ला बनाया जाता है। ये सिर्फ डिजाइन नहीं, असली स्प्रिंग है। ये तनाव पैदा करता है जिससे पिन का नुकीला सिरा ऊपर खांचे में कसकर फंसा रहता है। बिना इस तनाव के पिन बार-बार खुल जाएगी और चुभ सकती है।
ऊपर का गार्ड
4 / 5ऊपर का गार्ड (The Head/Guard)ये वो हिस्सा है जहां पिन का नुकीला सिरा बंद होकर सुरक्षित रहता है। इसी की वजह से पिन बंद रहती है और आप चुभने से बचते हैं।
सेफ्टी पिन का आविष्कार
5 / 5सेफ्टी पिन के बनने की कहानीशायद आपने कभी सोचा न हो कि आज जो सेफ्टी पिन हम इस्तेमाल करते हैं, उसे कब और किसने बनाया। आज वाली सेफ्टी पिन का आविष्कार वॉल्टर हंट ने 1849 में किया था। उन्होंने तार के एक टुकड़े को मोड़कर ये स्प्रिंग वाला सिस्टम बनाया, जो आज भी इस्तेमाल होता है।
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