डॉक्टर सफेद और वकील काला कोट ही क्यों पहनते हैं? आप नहीं जानते होंगे सही जवाब
क्या आपने कभी सोचा है आखिर वकीलों के पास काला और डॉक्टरों के पास सफेद कोर्ट क्यों होता है? आखिर इसका इतिहास क्या है.

जब भी कोई व्यक्ति सफेद कोट पहनकर दिखाई देता है तो लोग उसे डॉक्टर समझ लेते हैं, जबकि काला कोट देखते ही दिमाग में वकील ही आता है. सवाल उठता है कि आखिर दोनों पेशों को अलग-अलग रंग और यही रंग क्यों दिया गया? आइए जानते हैं कि इन दोनों पेशों में अलग-अलग रंग के कोट पहनने की शुरुआत कैसे हुई.
काले कोट का मतलब
2 / 6वकीलों के काले कोट का संबंध सिर्फ पहनावे से नहीं, बल्कि उसके गहरे अर्थ से भी जुड़ा है. काला रंग गंभीरता, अनुशासन और अधिकार का प्रतीक माना जाता है. अदालत में यह रंग यह संदेश देता है कि कानून के सामने सभी लोग समान हैं और न्याय पूरी ईमानदारी के साथ किया जाना चाहिए.
कैसे शुरू हुई काला कोट पहनने की परंपरा?
3 / 6इतिहासकारों के अनुसार, 17वीं शताब्दी में ब्रिटेन के शाही परिवार में किसी राजा की मृत्यु होने पर जज और वकील शोक व्यक्त करने के लिए काले कपड़े पहनते थे. धीरे-धीरे जैसे समय बीतता गया, शोक जताने वाला यह तरीका वकील के प्रोफेशन से ही जोड़ दिया गया.
डॉक्टरों के लिए सफेद कोट क्यों चुना गया?
4 / 6डॉक्टरों के सफेद कोट का सबसे बड़ा कारण स्वच्छता और विश्वास है. सफेद रंग साफ-सफाई, ईमानदारी, शांति और उम्मीद का प्रतीक माना जाता है. मरीज डॉक्टर को सफेद कोट में देखकर भरोसा महसूस करते हैं, इसलिए यह रंग मेडिकल पेशे की पहचान बन चुका है.
सफेद कोट का वैज्ञानिक महत्व भी है
5 / 6सफेद रंग पर धूल, दाग या गंदगी आसानी से दिखाई देती है. इसी कारण डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ अपने कपड़ों को साफ रखने के लिए ज्यादा सतर्क रहते हैं.
पहले डॉक्टर भी पहनते थे काला कोट
6 / 6बहुत कम लोग जानते हैं कि 19वीं शताब्दी से पहले कई डॉक्टर काले रंग के कोट पहनते थे. उस दौर में कुछ वैज्ञानिक गुलाबी और पीले रंग के लैब कोट का भी इस्तेमाल करते थे. बाद में मेडिकल साइंस में स्वच्छता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलने पर सफेद कोट को अपनाया गया और धीरे-धीरे यह पूरी दुनिया में डॉक्टरों की पहचान बन गया. (Image: AI) यह भी पढ़ें: सावन में ही क्यों ज्यादा दिखाई देते हैं सांप? नाग पंचमी से कनेक्शन या प्रकृति का नियम; जानें पूरी



















