चुनाव में जब्त कैश का क्या होता है? क्या हैं आचार संहिता से जुडे नियम
भारत लोकतांत्रिक देश है। यहां आए दिन किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहते हैं। चुनावी दिनों में आपने खूब सुना होगा कि कई नेताओं व आम गाड़ियों से लाखों-करोड़ों का कैश बरामद होता है। पुलिस या प्रशासन चुनाव में प्रयोग होने जा रहे कैश को जब्त कर लेता है। क्या आपने सोचा है कि आखिर इस जब्त कैश का क्या होता है, आइए विस्तार से जानते हैं।

जब्त कैश कहां रखते हैं
2 / 5जब्त किया गया सारा पैसा सरकारी ट्रेजरी/जिला कोषागार में जमा कर दिया जाता है। जब तक जांच पूरी नहीं होती या कोर्ट फैसला नहीं देता, पैसा वहीं रहता है।
टाइमलाइन
3 / 5EC की गाइडलाइन के मुताबिक 7 दिन के अंदर जिला समिति को फैसला देना होता है कि पैसा छोड़ा जाए या IT/पुलिस को सौंपा जाए।संक्षेप में: अगर कैश वैध है तो सबूत देने पर वापस मिल जाता है। अगर चुनाव में इस्तेमाल होना था तो केस चलता है और कोर्ट तय करता है। बाकी केस IT विभाग देखता है।
कानूनी परिणाम
4 / 5यदि जब्त की गई नकदी फर्जी साबित होती है, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 171B और 171C के तहत 1-2 वर्ष की कैद और जुर्माना हो सकता है। यदि दावा वैध साबित नहीं होता है, तो नकदी सरकारी खजाने में चली जाती है। चुनाव आयोग का उद्देश्य धन बल पर अंकुश लगाना है, जो लोकतंत्र की रक्षा करता है।
जांच और वेरिफिकेशन
5 / 5जब्ती के 24 घंटे के अंदर जिला शिकायत समिति को रिपोर्ट भेजी जाती है।अगर कैश किसी उम्मीदवार, पार्टी या चुनाव से जुड़ा पाया जाता है तो मामला आगे बढ़ता है। अगर पैसा वैध है और चुनाव से संबंध नहीं है तो सबूत दिखाने पर छोड़ दिया जाता है।
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