गुजरात में है 900 मंदिरों वाला रहस्यमयी पर्वत! यहां सूरज डूबते ही सूनसान हो जाती है पूरी पहाड़ी?
क्या आप जानते हैं गुजरात में एक ऐसा रहस्यमयी पर्वत है, जहां 900 मंदिर हैं और शाम होते हैं वहां सन्नाटा छा जाता है. आइए जानते हैं इस जगह के बारे में.

भारत में कई खूबसूरत पर्वतीय स्थल हैं, लेकिन गुजरात का शत्रुंजय पर्वत अपनी धार्मिक विशेषता के कारण अलग पहचान रखता है. यहां एक-दो नहीं, बल्कि करीब 900 मंदिर स्थित हैं, जो इसे बेहद खास बनाते हैं.
कहां है ये रहस्यमीय जगह
2 / 7गुजरात के भावनगर से करीब 51 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में पालीताना स्थित है. इसी क्षेत्र में शत्रुंजय पहाड़ियों पर मंदिरों का अनोखा समूह है, जिसे जैन धर्म के बेहद पवित्र तीर्थस्थलों में गिना जाता है.
आदिनाथ से जुड़ी है मान्यता
3 / 7मान्यता है कि जैन धर्म के पहले तीर्थंकर ऋषभ देव यानी आदिनाथ ने शत्रुंजय पर्वत चोटी पर स्थित मंदिर में अपना पहला उपदेश देकर पवित्र किया था. इतना ही नहीं, कहा जाता है कि, जैन धर्म के संस्थापक आदिनाथ ने पहाड़ी के शिखर पर रायन पेड़ के नीचे ध्यान किया था. यहां स्थित मंदिर भी उनसे जुड़ा बताया जाता है.
3750 से ज्यादा सीढ़ियों की चढ़ाई
4 / 7शत्रुंजय पर्वत पर स्थित मंदिरों तक पहुंचना आसान नहीं है. श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए करीब 3750 से ज्यादा पत्थर की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. इतनी मुश्किल चढ़ाई के बावजूद यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
कार्तिक पूर्णिमा पर उमड़ती है भीड़
5 / 7हर साल नवंबर से दिसंबर के बीच कार्तिक पूर्णिमा के दौरान शत्रुंजय पहाड़ियों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है. इस दौरान लोग पर्वत पर पहुंचकर धार्मिक मान्यताओं से जुड़े स्थलों के दर्शन करते हैं.
मजार भी है यहां मौजूद
6 / 7शत्रुंजय पर्वत पर भगवान आदिनाथ के मंदिर के अलावा मुस्लिम संत अंगार पीर की मजार भी बताई जाती है. मान्यता के अनुसार, मुगलों से पर्वत की रक्षा के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग यहां मत्था टेकते हैं.
सूर्यास्त के बाद छा जाता है सन्नाटा
7 / 7शत्रुंजय पर्वत की सबसे रहस्यमयी बात इसका नियम है. सूर्यास्त के बाद किसी को पहाड़ी पर रुकने की अनुमति नहीं होती. मान्यता है कि पर्वत देवताओं का निवास है, जो सूर्यास्त होने के बाद यहां विश्राम करने आते हैं. इसी वजह से यहां किसी को रुकने नहीं दिया जाता है. (Image: AI) यह भी पढ़ें: आजमगढ़ है यूपी का सबसे अनोखा जिला, जहां बहती हैं इतनी नदियां! यूपी वाले भी नहीं दे पाते