जींस में क्यों होती है ये छोटी पॉकेट? ज्यादातर लोग नहीं जानते असली वजह, 150 साल पुरानी है इसकी कहानी

जींस की छोटी जेब को लोग अक्सर सिक्के या चाबियां रखने के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका असली मकसद कुछ और था. 150 साल पुरानी इस छोटी पॉकेट का इतिहास जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. आखिर जींस में यह पांचवीं जेब क्यों दी जाती है और आज भी इसे क्यों हटाया नहीं गया? जानिए इसकी पूरी कहानी.

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150 साल पुराना है इस पॉकेट का इतिहास

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जींस में दी जाने वाली यह छोटी जेब कोई नया डिजाइन नहीं है. इसका इतिहास करीब 150 साल पुराना है. जब 1873 में पहली बार जींस बनाई गई थी, तब लोगों के पास कलाई घड़ियां नहीं होती थीं और वे पॉकेट वॉच का इस्तेमाल करते थे.

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पॉकेट वॉच को सुरक्षित रखने के लिए बनाई गई थी

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उस दौर में पॉकेट वॉच काफी महंगी और कीमती मानी जाती थी. इसे सुरक्षित रखने के लिए जींस में एक अलग छोटी जेब बनाई गई, जिसे "वॉच पॉकेट" कहा जाता था. इसका आकार खासतौर पर घड़ी को फिट करने के हिसाब से रखा गया था ताकि काम के दौरान उसके गिरने या टूटने का खतरा कम रहे.

मजदूरों और काउबॉय के लिए थी बेहद उपयोगी

मजदूरों और काउबॉय के लिए थी बेहद उपयोगी4 / 7

शुरुआती दौर में जींस मुख्य रूप से मजदूरों, खनिकों और काउबॉय द्वारा पहनी जाती थी. कठिन परिस्थितियों में काम करते समय पॉकेट वॉच को संभालना आसान नहीं था. ऐसे में यह छोटी जेब उनके लिए काफी उपयोगी साबित हुई. ये भी पढ़ें- Jio का धमाकेदार ऑफर! इस इकलौते प्लान में मिल रहा 56 दिन तक अनलिमिटेड 5G और कई

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समय बदला, लेकिन जेब बनी रही

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बाद में पॉकेट वॉच की जगह रिस्ट वॉच और फिर स्मार्टफोन ने ले ली. हालांकि जरूरत बदल गई, लेकिन जींस का यह डिजाइन इतना लोकप्रिय हो गया कि कंपनियों ने इस छोटी जेब को हटाने के बजाय बरकरार रखा. ये भी पढ़ें- WiFi और Mobile Data में कौन ज्यादा बैटरी खर्च करता है, जानकर रह जाएंगे हैरान!

आज इन चीजों के लिए किया जाता है इस्तेमाल

आज इन चीजों के लिए किया जाता है इस्तेमाल6 / 7

आज लोग इस छोटी पॉकेट का उपयोग कई छोटी वस्तुएं रखने के लिए करते हैं, जैसे:

  • सिक्के
  • चाबियां
  • ईयरबड्स या ईयरफोन
  • USB ड्राइव
  • अंगूठियां
  • अन्य छोटी जरूरी चीजें

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अब फैशन का हिस्सा बन चुकी है यह पॉकेट

अब फैशन का हिस्सा बन चुकी है यह पॉकेट7 / 7

दिलचस्प बात यह है कि यह छोटी जेब अब केवल उपयोगिता तक सीमित नहीं रह गई है. यह जींस के क्लासिक और पारंपरिक डिजाइन का अहम हिस्सा बन चुकी है. अगर इसे हटा दिया जाए, तो जींस का परिचित लुक अधूरा सा लग सकता है. (Images Credit-Freepik/Pexels/AI)

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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