Passport Rule: पासपोर्ट की अहमियत पर उठे 4 बड़े सवाल, नागरिकता का प्रमाण नहीं तो जांच की जरूरत क्यों?
Indian Passport Rules: विदेश यात्रा करने वाले हर भारतीय के लिए पासपोर्ट सबसे जरूरी दस्तावेज है, लेकिन, क्या आप जानते हैं कि कानूनन पासपोर्ट को लेकर क्या नियम हैं और इसे सरकार की संपत्ति क्यों माना जाता है? पासपोर्ट की अहमियत और इसकी कानूनी स्थिति को लेकर अक्सर 4 बड़े सवाल उठाए जाते हैं. जानें इनके जवाब

विदेशी नागरिकता मिलने पर भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करना क्यों जरूरी?
2 / 6भारत का संविधान देश के नागरिकों को 'दोहरी नागरिकता' रखने की अनुमति नहीं देता. इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति एक ही समय में भारत और किसी दूसरे देश का नागरिक नहीं रह सकता. जैसे ही आप किसी विदेशी देश की नागरिकता स्वीकार करते हैं, आपकी भारतीय नागरिकता कानूनन खत्म हो जाती है. यही कारण है कि विदेशी नागरिकता मिलते ही भारतीय पासपोर्ट को तुरंत सरेंडर करना अनिवार्य होता है.
पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, तो पुलिस जांच की क्या जरूरत है?
3 / 6विदेश मंत्रालय और बॉम्बे हाई कोर्ट के पुराने फैसलों के अनुसार, पासपोर्ट मुख्य रूप से विदेश में आपकी राष्ट्रीयता को दर्शाता है, लेकिन यह नागरिकता का अंतिम या अकाट्य प्रमाण नहीं है. फिर भी पुलिस वेरिफिकेशन इसलिए जरूरी है क्योंकि पासपोर्ट एक बेहद संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज है. पुलिस जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आवेदन करने वाले व्यक्ति का कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड तो नहीं है, या वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं है.
क्या भारत सरकार गैर-भारतीयों को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है?
4 / 6जी हां, विशेष परिस्थितियों में ऐसा संभव है. पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 (Section 20) के तहत केंद्र सरकार के पास यह विशेष अधिकार है कि वह जनहित को ध्यान में रखते हुए किसी ऐसे व्यक्ति को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है जो भारत का नागरिक नहीं है. यही सबसे बड़ा कारण है कि कानूनी तौर पर केवल पासपोर्ट के दम पर नागरिकता का पक्का दावा नहीं किया जा सकता.
सरकार क्यों कहती है कि पासपोर्ट उसकी संपत्ति है?
5 / 6पासपोर्ट के आखिरी पन्ने पर साफ लिखा होता है कि यह पासपोर्ट भारत सरकार की संपत्ति है. ऐसा इसलिए है क्योंकि पासपोर्ट जारी करने का अंतिम अधिकार सरकार के पास सुरक्षित होता है. यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर अपराध में लिप्त पाया जाता है, अदालती मामलों से भाग रहा हो या देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए खतरा बनता है, तो सरकार के पास यह कानूनी अधिकार होता है कि वह उस व्यक्ति का पासपोर्ट जब्त या रद्द कर सके. आपके पास मौजूद पासपोर्ट देश का प्रतिनिधित्व करने का एक माध्यम है, जिसका मालिकाना हक हमेशा सरकार के पास ही रहता है.
नागरिकता पर क्या कहता है पासपोर्ट अधिनियम 1967?
6 / 6पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया और इसके कानूनी पहलुओं को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति रहती है. पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 20 के तहत, केंद्र सरकार के पास यह अधिकार है कि वह विशेष परिस्थितियों में उन व्यक्तियों को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है जो भारत के नागरिक नहीं हैं. कई मामलों में उच्च न्यायालयों ने यह स्पष्ट किया है कि केवल पासपोर्ट होना ही किसी व्यक्ति को स्वतः भारत का नागरिक नहीं बना देता, यदि उसकी नागरिकता के अन्य वैधानिक आधारों पर कोई कानूनी विवाद हो.
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