वीक ऑफ पर बॉस की कॉल को लीगली मना कर सकते हैं? जानें क्या हैं नियम
Right To Disconnect: अगर आप भी नौकरपेशा हैं तो बखूबी समझते होंगे कि वीक ऑफ वाले दिन बॉस का फोन आ जाए तो क्या बीतती होगी। कई बार वीक ऑफ कैंसल करके बॉस ऑफिस बुला लेते हैं। ऐसे में आप ऑफ वाले दिन बॉस का फोन नहीं उठाना चाहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वीक ऑफ वाले दिन आप बॉस के फोन को उठाने से लीगल तरीके से मना कर सकते हैं।

मौलिक अधिकार
2 / 6यह सवाल वाकई महत्वपूर्ण है। क्या छुट्टी के दिन ऑफिस का फोन उठाना हमारी जिम्मेदारी है? आधुनिक वर्क कल्चर कहता है कि आराम का समय आपका मौलिक अधिकार है, और 'राइट टू डिस्कनेक्ट' इस अधिकार को मजबूत करता है।
राइट टू डिस्कनेक्ट
3 / 6क्या छुट्टी के दिन ऑफिस का फोन उठाना जरूरी है? आधुनिक वर्क कल्चर और 'राइट टू डिस्कनेक्ट' कहता है कि आपका आराम का समय आपका अधिकार है, और आप इसे नजरअंदाज कर सकते हैं!
श्रम कानून
4 / 6भारत के श्रम कानूनों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, छुट्टी का मतलब है मानसिक और शारीरिक विश्राम। अगर आपके अपॉइंटमेंट लेटर में आपातकालीन ड्यूटी का उल्लेख नहीं है, तो अवकाश के दिन काम के लिए दबाव डालना मानसिक प्रताड़ना माना जा सकता है । आइए जानते हैं कि कानून क्या कहता है!
कॉम्पेंसेटरी ऑफ
5 / 6भारत का श्रम कानून कहता है कि छुट्टी के दिन काम के लिए आपको सहमति देनी होगी और बदले में कॉम्पेंसेटरी ऑफ मिलनी चाहिए। फैक्ट्री एक्ट और शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत साप्ताहिक छुट्टी मिलनी चाहिए। लगातार काम का दबाव स्वास्थ्य के खिलाफ है और इसके लिए शिकायत की जा सकती है।
राइट टू डिस्कनेक्ट
6 / 6'राइट टू डिस्कनेक्ट' का मतलब है कि ऑफिस के समय के बाद काम से दूरी बनाने का अधिकार है। कई देशों में यह कानून है, और भारत में भी आधुनिक कंपनियां 'नो कॉल ऑन वीकेंड' पॉलिसी अपनाने लगी हैं। यह प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और बर्नआउट से बचाने के लिए है!
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