रेगिस्तान में दुर्लभ बाजों का बसेरा, क्या राजस्थान बचा पाएगा दुनिया के आखिरी 'स्टेपी ईगल्स' को?

कजाकिस्तान और दक्षिणी रूस के घास के मैदानों से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर 'स्टेपी ईगल्स' बड़ी संख्या में राजस्थान पहुंचे हैं. पश्चिमी राजस्थान के जोरबीर और डेजर्ट नेशनल पार्क में हाल ही में हुए सर्वे में 2,000 से अधिक ईगल्स रिकॉर्ड किए गए हैं. हालांकि, पक्षी प्रेमियों के लिए यह खबर सुखद लग सकती है, लेकिन वैज्ञानिक इसे एक "रेड फ्लैग" मान रहे हैं, जो इस प्रजाति के वैश्विक स्तर पर सिमटते आवास की ओर इशारा कर रहा है.

Eagle
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राजस्थान में लैंडिंग

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हजारों किलोमीटर का सफर तय कर कजाकिस्तान से आए दुर्लभ स्टेपी ईगल्स अब राजस्थान के रेगिस्तान को अपना शीतकालीन घर बना रहे हैं. पश्चिमी राजस्थान के खुले मैदान और रेतीले टीले इन पक्षियों के प्राकृतिक आवास से काफी मेल खाते हैं.

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सर्वे के आंकड़े

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जोरबीर कंजर्वेशन रिजर्व और डेजर्ट नेशनल पार्क में किए गए सर्वे में 2,000 ईगल्स दर्ज किए गए हैं. लुप्तप्राय प्रजाति का इतनी बड़ी संख्या में एक ही जगह जमा होना एक दुर्लभ और चौंकाने वाली घटना है.

वैज्ञानिकों की चेतावनी

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वैज्ञानिकों के अनुसार, ईगल्स का एक जगह इकट्ठा होना यह दर्शाता है कि उनके अन्य आवास नष्ट हो रहे हैं. यह 'बढ़ती संख्या' वास्तव में उनकी वैश्विक आबादी में गिरावट और सिमटते सुरक्षित क्षेत्रों का एक गंभीर संकेत है.

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राजस्थान का आकर्षण

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पश्चिमी राजस्थान के खुले परिदृश्य और कैरियन (मृत पशुओं) के डंपिंग ग्राउंड इन बाजों को भरपूर भोजन और शांति प्रदान करते हैं. यह क्षेत्र वर्तमान में इस प्रजाति के लिए दुनिया के आखिरी विश्वसनीय शीतकालीन ठिकानों में से एक बन गया है.

भविष्य का संकट

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विशेषज्ञों का मानना है कि ईगल्स की बढ़ती संख्या से भोजन के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और बिजली की लाइनों जैसे खतरे पैदा हो सकते हैं. यदि समय रहते संरक्षण के प्रयास नहीं बढ़े, तो यह सुरक्षित शरणस्थली भी उनके लिए जोखिम भरी बन सकती है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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