ड्राइवर के बिना ब्रेक लगाए कैसे रुक जाती है ट्रेन? जानिए कैसे काम करता है अलार्म चेन सिस्टम
भारतीय ट्रेनों में सफर के दौरान आपने हर कोच में एक लाल रंग की 'इमरजेंसी चेन' जरूर देखी होगी. किसी भी इमरजेंसी में इसे खींचते ही रफ्तार से दौड़ती ट्रेन चंद मिनटों में थम जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी सी जंजीर खींचने से इतनी बड़ी ट्रेन बिना लोको पायलट के ब्रेक लगाए कैसे रुक जाती है? हम बताएंगे कि कैसे ट्रेन का अलार्म चेन सिस्टम काम करता है.

कब हुई थी इसकी शुरुआत
2 / 9ब्रिटिश इंजीनियर जॉर्ज वेस्टिंगहाउस ने सबसे पहले यह मैकेनिज्म बनाया था. यही मॉडल 150 वर्षों से ट्रेनों में इस्तेमाल हो रहा है.
अलार्म चेन
3 / 9हर कोच में लगी इमरजेंसी चेन सीधे ट्रेन के मुख्य ब्रेक सिस्टम से जुड़ी होती है, जिसे यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है.
ब्रेक पाइप का जाल
4 / 9पूरी ट्रेन के नीचे एक मोटी पाइप का जाल बिछा होता है, जिसमें इंजन से लेकर आखिरी डिब्बे तक हवा का भारी दबाव बना रहता है.
प्रेशर का खेल
5 / 9जैसे ही कोई चेन खींचता है, उससे जुड़ा वॉल्व खुल जाता है और पाइप की हवा तेजी से बाहर निकलने लगती है, जिससे प्रेशर अचानक गिर जाता है.
पहियों की जकड़
6 / 9एयर प्रेशर कम होते ही ब्रेक सिलेंडर सक्रिय हो जाते हैं और पिस्टन के जरिए ब्रेक ब्लॉक ट्रेन के पहियों को मजबूती से जकड़ लेते हैं.
कैसे चलता है पता
7 / 9चेन खींचते ही उस कोच के बाहर एक इंडिकेटर लाइट जलने लगती है और हवा निकलने की तेज आवाज आती है, जिससे RPF या गार्ड को पता चल जाता है कि चेन पुलिंग कहां हुई है.
कैसे करते हैं ठीक
8 / 9ट्रेन तब तक आगे नहीं बढ़ सकती जब तक गार्ड या RPF स्टाफ मैन्युअली उस कोच के वॉल्व को वापस बंद कर एयर प्रेशर को सामान्य नहीं कर देते.
बिना वजह खींचने पर क्या है सजा
9 / 9बिना किसी सही वजह के अलार्म चेन खींचना इंडियन रेलवे एक्ट, 1989 के सेक्शन 141 के तहत एक गंभीर जुर्म है. दोषियों को एक साल तक की जेल, 1,000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
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