बच्चे को क्यों हो जाती है कब्ज? डॉक्टर ने बताया माता-पिता की ये 7 गलतियां बनती हैं वजह

Constipation In Children: बच्चों में कब्ज होना ऐसी दिक्कत है जो माता-पिता के लिए मुसीबत का सबब बन जाती है. ऐसे में पीडियाट्रिशियन बता रहे हैं कि पैरेंट्स की कौन सी गलतियां बच्चे में कब्ज की दिक्कत बढ़ा देती हैं.

Bacho ko kabj kyu hoti hai
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Bacho ko kabj kyu hoti hai

Constipation Causes: बच्चों में कब्ज होना एक आम समस्या है जो शरीर में पानी की कमी या खानपान में भरपूर फाइबर ना होने से हो सकती है. बच्चों में इतनी समझ नहीं होती कि उन्हें पता हो क्या खाना सही है और क्या नहीं. ना ही बच्चों को लाइफस्टाइल के बारे में ज्यादा कुछ पता होता है. ऐसे में यह माता-पिता की जिम्मेदारी हो जाती है कि वे बच्चों की सेहत को दुरुस्त रखें. लेकिन, माता-पिता अक्सर ही कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जो बच्चे में कब्ज की वजह बन सकती हैं. इसी बारे में बताते हए पीडियाट्रिशियन डॉ. रवि मलिक ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से वीडियो शेयर किया है और बताया है कि पैरैंट्स की किन गलतियों को कारण बच्चे को कब्ज हो जाती है.

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फाइबर ना खिलाना

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बच्चे में कब्ज होने की एक वजह डाइट में फाइबर की कमी भी होता है. पैरेंट्स बच्चे को फाइबर से भरपूर फल या सब्जियां नहीं देते हैं तो बच्चे में कब्ज की संभावना बढ़ जाती है.

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बहुत ज्यादा दूध देना

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बच्चे को बहुत ज्यादा मात्रा में दूध देने पर भी कब्ज हो सकती है. दूध में फाइबर बिल्कुल भी नहीं होता है जिससे कब्ज का खतरा रहता है. ऐसे में डॉक्टर का कहना है कि दिन में बच्चे को 400 ग्राम से ज्यादा दूध की आवश्यक्ता नहीं होती है.

बच्चे को पानी कम पिलाना

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अगर आप बच्चे को पानी कम पिलाते हैं तो इससे कब्ज हो सकती है. बच्चे को हाइड्रेटेड रखेंगे तो कब्ज की संभावना कम होती है.

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कब्ज को ना समझ पाना

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पैरैंट्स की एक बड़ी गलती यह भी है कि वे बच्चे की कब्ज को पहचान नहीं पाते हैं. अगर बच्चा 2 दिनों के बाद फ्रेश होता है या पॉटी करता है और मल सख्त नहीं है, उसे परेशानी नहीं हो रही है तो इसे कब्ज नहीं कहते.

फिजिकल एक्टिविटी की कमी

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बाहर जाकर खेलने-कूदने की कमी के कारण बच्चे को कब्ज हो सकती है. अगर बच्चा बाहर जाकर खेलता है तो इससे कब्ज होने की संभावना कम रहती है.

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दवाइयों पर निर्भरता

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माता-पिता लाइफस्टाइल सुधारने के बजाय दवाओं पर निर्भर रहते हैं. अगर बच्चे के लाइफस्टाइल को बेहतर किया जाए तो कब्ज से बचा जा सकता है.

डॉक्टर की सलाह से दवाएं लेना

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अगर लाइफस्टाइल से कब्ज ठीक नहीं होती है तो डॉक्टर की सलाह से उतनी ही दवा लें जितनी डॉक्टर ने लेने के लिए कही है. यह भी पढ़ें – खेलते हुए बच्चा गिर जाए तो इन 5 लक्षणों पर जरूर करें गौर, हो सकता है ब्रेन इंजरी का सिग्नल

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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