किचन से लेकर बेडरूम तक, घर की इन चीजों को लेकर बरतें सावधानी; बढता सकता है कैंसर का जोखिम

कैंसर का खतरा लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में जरूरी है कि हम अपनी सेहत का ख्याल रखें और उन चीजों से दूर रहें जिससे इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है.

Household Goods That Might Cause Cancer Ghar ki Kin cheezon se cancer hota hai
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नॉन-स्टिक, प्लास्टिक के कंटेनर, रूम फ्रेशनर या हेयर डाई जैसी चीजों से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. Image Credit- Magnific

घर को साफ-सुथरा रखने के लिए कई तरह की चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. किचन में खाना बनाने के बर्तन हों, सफाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल, बेडरूम में रखे फ्रेशनर या फर्नीचर का सामान... ये सभी चीजें हमारी जिंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ सामान दिखने में तो अच्छे लगते हैं मगर हेल्थ के लिए काफी नुकसानदायक होते हैं. लंबे समय तक रहने से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है? आइए हार्वर्ड विश्वविद्यालय की रिपोर्ट और आयुर्वेदिक एक्सपर्ट मोहम्मद फुरकान से जानते हैं ऐसी चीजों के बारे में जिनसे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.  

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नॉन-स्टिक कुकवेयर का इस्तेमाल

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नॉन-स्टिक पैन और बर्तनों में खाना बनाना आसान होता है, क्योंकि इसपर खाना चिपकता नहीं है. हालांकि, इन बर्तनों का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना जरूरी है. खासतौर पर खाली पैन को बहुत ज्यादा गर्म करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे कोटिंग हटने लगती है और यह नुकसानदायक हो सकती है.

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प्लास्टिक के कंटेनर या फूड रैप

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किचन में खाना रखने, पैक करने और गर्म करने के लिए प्लास्टिक के डिब्बों और रैप का इस्तेमाल आम है, लेकिन हर तरह का प्लास्टिक गर्म खाना या माइक्रोवेव के लिए सही नहीं होता. NCHR की रिपोर्ट के मुताबिक, गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर कुछ केमिकल खाने में आ जाते हैं और यह हेल्थ को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं.

रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल

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फर्श साफ करने वाले लिक्विड, बाथरूम क्लीनर और रूम फ्रेशनर से भी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. हार्वर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक,  इसमें मौजूद केमिकल्स एलर्जी पैदा कर सकते हैं, जिससे स्किन को काफी नुकसान हो सकता है.

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हार्ड हेयर डाई

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NIH की 2019 की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्यादा डार्क रंग का कलर या केमिकल हेयर स्ट्रेटनर का नियमित रूप से इस्तेमाल करना महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है, लेकिन यह बीमारी हो जाए यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है.

फफूंदी लगे मसाले इस्तेमाल करना

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मसाले रखे-रखे कब खराब होने लगते हैं यह पता ही नहीं चलता और लोग बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करते रहते हैं. आप ऐसा न करें और अगर मसाले पुराने हो चुके हैं यह इसमें नमी चली गई है तो फेंकने पर विचार करें. इसका सेवन करने से कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है. इसे भी पढ़ें- रोज होने लगी हैं ये 7 दिक्कतें तो जरूर करवाएं डायबिटीज का टेस्ट, Type 2 Diabetes में शरीर देता है संकेत, समय रहते करनी होगी पहचान

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
Source- harvard, WHO, NCHR,  

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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