टायर पर बने छोटे-छोटे रबर के बाल आखिर क्यों होते हैं? 99% लोग नहीं जानते इनका काम

नई कार, बाइक या स्कूटी के टायर पर दिखने वाले छोटे-छोटे रबर के बाल को लेकर लोगों के मन में कई तरह की गलतफहमियां हैं. कोई इन्हें बेहतर ग्रिप से जोड़ता है तो कोई माइलेज से, लेकिन इनका असली काम कुछ और ही है. जानिए टायर पर ये रबर के बाल क्यों होते हैं और क्या बताते हैं.

TYre baal
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अगर आपने कभी नई कार, बाइक या स्कूटी का टायर ध्यान से देखा हो, तो उस पर छोटे-छोटे रबर के बाल जरूर नजर आए होंगे. इन्हें देखकर कई लोग सोचते हैं कि ये टायर की ग्रिप बढ़ाने या माइलेज बेहतर करने के लिए होते हैं, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है.

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इन्हें क्या कहा जाता है और कब तक रहते हैं?

इन्हें क्या कहा जाता है और कब तक रहते हैं?2 / 7

टायर इंडस्ट्री में इन छोटे रबर के बालों को वेंट स्प्यूज (Vent Spews) या टायर निब्स (Tyre Nibs) कहा जाता है. कुछ जगह इन्हें स्प्रू नब्स, गेट मार्क्स या निप्पर्स के नाम से भी जाना जाता है. ये केवल नए टायरों पर दिखाई देते हैं और कुछ सौ किलोमीटर चलने के बाद सामान्य रूप से घिसकर अपने आप खत्म हो जाते हैं.

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टायर बनाने की प्रक्रिया में बनते हैं ये रबर के बाल

टायर बनाने की प्रक्रिया में बनते हैं ये रबर के बाल3 / 7

इन रबर के बालों का बनना टायर निर्माण की एक जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा है. टायर तैयार करते समय कच्चे रबर को एक खास मोल्ड में रखा जाता है. इसके बाद उस पर तेज गर्मी और हवा का दबाव डाला जाता है, ताकि रबर पूरी तरह मोल्ड का आकार ले सके और मजबूत टायर तैयार हो. ये भी पढ़ें- कल लॉन्च होगी नई Renault Kwid! SUV जैसा लुक और प्रीमियम फीचर्स से करेगी सबको हैरान

मोल्ड के छोटे छेद निभाते हैं अहम भूमिका

मोल्ड के छोटे छेद निभाते हैं अहम भूमिका4 / 7

टायर के मोल्ड में बहुत छोटे-छोटे वेंट होल बने होते हैं. इनका काम अंदर फंसी हुई हवा को बाहर निकालना होता है. जब दबाव बढ़ता है, तो हवा इन छेदों से बाहर निकल जाती है और उसके साथ थोड़ा-सा पिघला हुआ रबर भी बाहर आ जाता है. बाद में यही रबर ठंडा होकर सख्त हो जाता है और छोटे-छोटे रबर के बालों की तरह दिखाई देता है.

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क्या ड्राइविंग के दौरान इनका कोई फायदा होता है?

क्या ड्राइविंग के दौरान इनका कोई फायदा होता है?5 / 7

इन रबर के बालों का गाड़ी की परफॉर्मेंस से कोई संबंध नहीं होता. ये न तो टायर की पकड़ बढ़ाते हैं, न माइलेज सुधारते हैं और न ही सड़क पर शोर कम करने में मदद करते हैं. सुरक्षा, स्पीड या ड्राइविंग अनुभव पर भी इनका कोई असर नहीं पड़ता. कुछ समय बाद ये सामान्य इस्तेमाल में अपने आप घिस जाते हैं. ये भी पढ़ें- No PUC No Fuel Rule: दिल्ली में अब ये काम किए बिना नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल! सरकार का बड़ा आदेश लागू

फिर इनका असली काम क्या होता है?

फिर इनका असली काम क्या होता है?6 / 7

ये छोटे-छोटे रबर के बाल इस बात का संकेत होते हैं कि टायर बनाते समय मोल्ड के अंदर फंसी हवा पूरी तरह बाहर निकल गई थी. इससे रबर पूरे टायर में बराबर फैल जाता है और उसके अंदर हवा के बुलबुले बनने की संभावना नहीं रहती.

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नए टायर की गुणवत्ता का भी होता है संकेत

नए टायर की गुणवत्ता का भी होता है संकेत7 / 7

अगर टायर के अंदर हवा फंस जाए, तो उसकी मजबूती प्रभावित हो सकती है. इसलिए नए टायर पर दिखाई देने वाले ये रबर के बाल इस बात का संकेत माने जाते हैं कि टायर सही प्रक्रिया से तैयार किया गया है. यानी ये टायर की क्वालिटी और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस की निशानी हैं, न कि किसी अतिरिक्त फीचर का हिस्सा. (Images Credit-Maginific)  

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

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मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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