धनिया-पुदीना नहीं, लाल चींटियों से बनती है ये चटनी! जानिए ओडिशा की ‘काई चटनी’ की खासियत

Kai Chutney Recipe: ओडिशा की काई चटनी अपने अनोखे इंग्रीडिएंट्स के लिए जानी जाती है. इस दौरान लाल बुनकर चींटियों का इस्तेमाल किया जाता है. इसे बहुत ही खास तरीके से बनाया जाता है. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं लाल चींटी से जुड़े फैक्ट्स-

Kai Chutney Recipe

क्या है काई चटनी? Image Credit- Freepik

भारत एक ऐसा देश है जो अपने स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए जाना जाता है. यहां पर आपको हर तरीके के व्यंजन मिल जाएंगे और इनका अपना अलग इतिहास रहा है. इस लिस्ट में कुछ चटनी ऐसी हैं, जिनका नाम ही सुनकर अजीब लग सकता है. हालांकि, भारत में एक नहीं बल्कि कई तरह की चटनियां बनाई जाती हैं, लेकिन ओडिशा की काई चटनी अपने अनोखे स्वाद और बनाने के तरीके की वजह से बाकी चटनियों से बिल्कुल अलग है. खास बात यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली लाल बुनकर चींटियों की वजह से यह लंबे समय से चर्चा में रही है. लोग इसे बहुत ही चाव से खाते हैं, जिसकी वजह से इसे जीआई टैग भी मिल चुका है. बता दें जीआई टैग का पूरा नाम जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी भौगोलिक संकेत है.

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क्या है काई चटनी?

काई चटनी ओडिशा के मयूरभंज जिले की पारंपरिक चटनी है. इसे स्थानीय लोग काई कहते हैं. इसे लाल बुनकर चींटियों और उनके अंडों से तैयार किया जाता है. ये चींटियां मयूरभंज के जंगलों, खासकर सिमिलिपाल इलाके में पाई जाती हैं. 

कैसे तैयार होती है ये अनोखी चटनी?

काई चटनी बनाने के लिए लाल बुनकर चींटियों और उनके अंडों को इकट्ठा करके साफ किया जाता है. इसके बाद इन्हें स्थानीय मसालों के साथ पीसकर चटनी तैयार की जाती है. अलग-अलग जगहों और परिवारों में इसे बनाने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है. कई लोग इसे अदरक, लहसुन, मिर्च और नमक जैसे मसालों का इस्तेमाल किए जाते हैं.   

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स्वाद कैसा होता है?

काई चटनी अपने तीखे, खट्टे और मसालेदार स्वाद के लिए जानी जाती है. लाल चींटियों में मौजूद फॉर्मिक एसिड इसके स्वाद में खट्टापन ला सकता है. यही अनोखा स्वाद इसे दूसरी चटनी से इसे बहुत ही अलग बनाता है. 

आदिवासी संस्कृति से जुड़ी है काई चटनी का इतिहास 

आप सोच रहे होंगे कि यह चटनी कोई कैसे खा सकता है, लेकिन इसका इतिहास आदिवासी से जुड़ा है. मयूरभंज के कई आदिवासी समुदायों के लिए काई चटनी पारंपरिक खानपान की संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है. पहले जंगलों से चींटियों को इकट्ठा किया जाता है फिर उन्हें तैयार किया जाता है. 

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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