Hathi Dant Ki Chudiya: सुहागिन महिलाओं के लिए चूड़ियां बहुत ही मायने रखती हैं. उनके बिना श्रृंगार अधूरा ही लगता है, इसलिए मार्केट में एक नहीं, बल्कि कई तरह की चूड़ियां देखने को मिलती हैं जिसे अपनी पसंद या कपड़ों के हिसाब से खरीदा जा सकता है. जब भी आप खरीदारी करने के लिए जाएंगे तो आपको प्लास्टिक, कांच या फिर चूड़े देखने को मिलते हैं. भारत में वैसे ही चूड़ियों की परंपरा बहुत पुरानी रही है. पहले अलग-अलग इलाकों में इन्हें शंख, लाख, धातु, कांच और हाथीदांत जैसी सामग्रियों से बनाया जाता था. इनमें हाथीदांत की चूड़ियां कभी शाही परिवारों और कुछ खास समुदायों की पारंपरिक ज्वेलरी का हिस्सा हुआ करती थीं. हालांकि, आज भी राजस्थान में हाथीदांत की चूड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में आइए यह जानते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है और यह कैसी होती हैं.
इसे भी पढ़ें- धूल-प्रदूषण से बाल बनते जा रहे झाड़ू, आज ही से अपनाएं ये टिप्स दूर होने लगेगी गंजेपन की समस्या
हाथीदांत की चूड़ियां क्या होती थीं?
हाथीदांत यानी हाथी के दांत से तैयार की गई चूड़ियों को आइवरी बैंगल्स भी कहा जाता है. इनका रंग सफेद या हल्का क्रीमी होता था और इन्हें काटकर, तराशकर और पॉलिश करके गोल शेप दिया जाता था. भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसका इस्तेमाल अलग परंपराओं के साथ हुआ. इतिहास में हाथीदांत की चूड़ियों शाही परिवारों के लोग ज्यादातर पहना सकते थे.
शादी और सुहाग से क्यों जुड़ी थीं?
कई भारतीय समुदायों में चूड़ियां सिर्फ लुक को सुंदर दिखाने के लिए नहीं, बल्कि शादी और सामाजिक परंपराओं से भी जुड़ी थीं. राजस्थान में राजपूत और मारवाड़ी समुदायों में हाथीदांत की चूड़ियों का शादी समारोहों में इस्तेमाल किया जाता था. इन्हें शुभ माना जाता था और पारंपरिक रूप से लखेरा समुदाय के कारीगर इनके निर्माण से जुड़े रहे हैं.
हाथीदांत की चूड़ियां कैसे बनाई जाती थीं?
पुराने समय में यह काम पूरी तरह से कारीगरों के हाथ और पारंपरिक औजारों पर निर्भर था. कच्छ की परंपरा के मुबारिक, हाथीदांत के टुकड़े को पहले एक शेप में काटा जाता था. इसके बाद, इसे लकड़ी के सपोर्ट और हाथ से चलने वाले औजारों की मदद से घुमाया जाता था. कारीगर अंदर का हिस्सा काटकर चूड़ी का गोल शेप तैयार करते थे.
कैसे दी जाती थी चूड़ियों को चमक?
चूड़ी का शेप और डिजाइन तैयार होने के बाद उसे बारीकी से घिसकर चिकना किया जाता था और पॉलिश की जाती थी. कच्छ की परंपरा में चूड़ियों को लाल रंग भी दिया जाता था. पुराने जमाने में नेचुरल रंगों का इस्तेमाल किया जाता था और रंग को लंबा चलाने के लिए एक तरह का केमिकल का इस्तेमाल किया जाता था.
एक हाथी के दांत से कितनी चूड़ियां बनती थीं?
यह हाथीदांत के शेप, उसकी लंबाई और चूड़ियों के डिजाइन पर डिपेंड करती थी. इसमें से आसानी से 2 से 3 और कई बार 5 चूड़ियां आराम से बनाई जा सकती थीं. इसका सबसे बड़ा कारण हाथियों के संरक्षण और आइवरी पर लगे कानूनी प्रतिबंध हैं. भारत में हाथी वन्यजीव हैं और हाथीदांत का व्यापार करना सही नहीं है.
इसे भी पढ़ें- रूखे बालों को बनाएं सॉफ्ट और शाइनी, एलोवेरा जेल से ऐसे तैयार करें ये हेयर मास्क
संबंधित खबरें
बिहार की इस मिठाई के आगे भूल जाएंगे खीर और हलवा! घर पर बनाएं मकुटी
5 hrs agoगोवर्धन पूजा पर गोबर से बनाएं श्रीकृष्ण की मूर्ति, इन स्टेप्स को करें फॉलो
6 hrs agoघर पर बनाएं हलवाई जैसी खस्ता मठरी, चाय के साथ खाने का मजा होगा दोगुना
7 hrs agoदिवाली के बाद कैसे करें घर की सफाई? जानिए पटाखों का कालापन हटाने का तरीका
10 hrs agoकैसे बनाएं अपना दिवाली इनविटेशन कार्ड, AI से तैयार करें यूनिक डिजाइन
11 hrs agoDiwali Latest Rangoli Designs: दीपावली पर बनाएं ये आसान और सुंदर रंगोली
12 hrs agoदिवाली पर बनाएं सॉफ्ट और फूली-फूली पूड़ी, घंटों तक रहेगी मुलायम
15 hrs agoसुख-समृद्धि और खुशहाली से भरी हो आपकी दिवाली, अपनों को ऐसे दें शुभकामनाएं
1 day agoदीपावली पर पूजा की थाली सजाएं कुछ इस तरह, फोटोज भी आएंगी खूबसूरत
1 day agoइस दिवाली फोटो को दें रॉयल लुक! बस कॉपी-पेस्ट करें ये AI Prompts
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines