Toilet Museum Delhi: दिल्ली में घूमने के लिए एक से बढ़कर एक जगह हैं। जहां जाकर आप अपने वीकेंड को खास बना सकते हैं। खासतौर पर अगर आपको अजीबोगरीब चीजें देखने का शौक है, तो इसके लिए आप दिल्ली के टॉयलेट म्यूजियम भी जा सकते हैं। यहां पर आपको एक से बढ़कर एक टॉयलेट देखने को मिल जाएंगे। साथ ही उनके साथ उनकी जानकारी भी जानने को मिलेगी। इसके अलावा आपको यहां सोने से बना टॉयलेट भी देखने को मिलेगा, जो इस म्यूजियम का आकर्षण का केंद्र भी हैं। सोने से बने टॉयलेट को देखने के लिए यहां पर लोग दूर-दूर से आते हैं। आइए अब जानते हैं टॉयलेट म्यूजियम से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में। ये भी पढ़ें- मुफ्त में करें Delhi की सैर! एक या दो नहीं इन 25 जगहों पर एंट्री है बिल्कुल फ्री

टॉयलेट म्यूजियम कहां पर है?

वर्ष 1992 में शौचालय संग्रहालय की स्थापना दिल्ली में की गई थी। ये म्यूजियम दिल्ली के सुलभ भवन, आरजेड-83, डाबरी पालम रोड, महावीर एन्क्लेव 1 में बनाया गया है। टॉयलेट म्यूजियम को अंतरराष्ट्रीय सुलभ शौचालय संग्रहालय भी कहा जाता है। इस म्यूजियम की खास बात ये है कि, यहां आपको एक या दो नहीं बल्कि करीब 50 देशों के शौचालय देखने को मिलेंगे। वहीं कुछ तो तीन हजार ईसा पूर्व से लेकर 20वीं शताब्दी के बीच के भी हैं।

टॉयलेट म्यूजियम की क्या है खासियत?

माना जाता है पहले के समय में राजा-महाराजा सोने से बने हुए शौचालय का इस्तेमाल करते थे, जो आज तक यहां पर रखे गए हैं। यहां पर एक शौचालय है, जो पूरी तरस सोने से बनाया गया है। कहा जाता है कि यहां पर मौजूद सोने से बने टॉयलेट को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। इसके अलावा आपको यहां पर कुछ अजीबोगरीब टॉयलेट भी देखने को मिलेंगे। यहां पर एक टॉयलेट तो ऐसा है जो दो मंजिल का है, जिस पर बेहतरीन नक्काशी की गई है। दरअसल, जैसे दीवारों पर नक्काशी की जाती है, वैसे ही पहले के समय में शौचालय पर भी नक्काशी की जाती थी। यहां पर आपको उन शौचालय की भी झलक देखने को मिलेगी, जिन पर कमाल की नक्काशी की गई है।  इसी के साथ आपको यहां पर मौजूद हर एक शौचालय की जानकारी भी जानने को मिलेगी।

टॉयलेट म्यूजियम किस समय खुलता है?

सुलभ इंटरनेशनल टॉयलेट म्यूजियम, रोजाना सुबह 10:30 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक आम जनता के लिए ओपन रहता है। यहां पर आने के लिए आपको कैब भी मिल जाएगी। इसके अलावा मेट्रो से म्यूजियम तक आने के लिए ऑटो रिक्शा भी चलती हैं। आप उससे भी यहां आ सकते हैं। ये भी पढ़ें- एक मोक्ष का दरवाजा, दूसरा स्वर्ग का रास्ता: 5 पॉइंट में जानें श्रीकृष्ण के द्वारकाधीश मंदिर के रहस्य