जेल में कैदियों को क्या क्या सुविधा मिल सकती है? ज्यादातर लोग नहीं जानते होंगे इसका जवाब

Tihar Jail Facility For Prisoners: तिहाड़ जेल में कैदियों को सजा के दौरान कई सुविधाएं मिलती हैं. इनका फायदा कैदी अपनी इच्छा के हिसाब से उठा सकता है. अगर आपको इसका अंजादा नहीं है तो यह लेख मददगार साबित हो सकता है. 

Tihar Jail Facility For Prisoners

जेल में कैदियों को क्या क्या सुविधा मिल सकती है? Image Credit- Chatgpt

Jail Mein Kya Suvidha Milti Hai: फिल्मों और टीवी सीरियल्स में जेल की जिंदगी अक्सर बेहद मुश्किल दिखाई जाती है. हालांकि, रियल में भी जेल की जिंदगी काफी मुश्किल होती है, लेकिन इसके साथ-साथ कैदियों को कई तरह की सुविधाएं भी मिलती हैं. भारत में जेल को सही तरह से चलाने के लिए कई तरह के नियम बनाए हैं. ये नियम कैदियों के जिंदगी थोड़ी आसान बना देता है. हाालंकि, हर कैदी को एक ही तरह की सुविधा मिले और हर किसी को मिले… ये बिल्कुल भी जरूरी नहीं है. कुछ कैदी के लिए यह सुविधाएं बिल्कुल बंद होती है. ऐसे में इस लेख में जानते हैं कि जेल में कैदियों को कुछ बुनियादी सुविधाएं और अधिकार क्या दिए जाते हैं. 

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पढ़ने की सुविधा 

जेल में कैदियों को पढ़ने की भी सुविधा मिलती है. हालांकि, यह सुविधा कई कैदियों को मिलती है, जिसमें लाइब्रेरी और सिलाई, बढ़ईगीरी, कंप्यूटर, हस्तशिल्प जैसी चीजों शामिल है. इससे जब कोई कैदी रिहा होने के बाद बाहर आता है तो उसे रोजगार पाने में मदद मिल सकती है.

काम करने की सुविधा 

आपको जानकर हैरानी होगी कि जेल में कैदी काम भी किया जा सकता है. आप पढ़ाई के साथ-साथ काम करके भी पैसा कमा सकते हैं. अपना पूरा दिन बढ़ईगीरी, सिलाई-कढ़ाई, बेकरी या खेती करके पैसे कमाए जा सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कैदियों को रोज के हिसाब से पैसे मिलते हैं, जिन्हें वो जमा करके भी रख सकते हैं. 

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कपड़े लेने की सुविधा

कुछ कैदियों को पहनने के लिए दूसरे कपड़े भी दिए जाते हैं. इसके अलावा साबुन, टूथपेस्ट, टूथब्रश जैसी चीजें भी कोर्ट या नियम के मुताबिक दी जा सकती हैं. हालांकि, ये सुविधा कुछ ही कैदियों को मिलती है, जिसके लिए परमिशन लेनी पड़ती है. 

पैरोल की सुविधा 

कैदी सजा के दौरान अपने परिवार में होने वाले किसी फंक्शन में हिस्सा लेने के लिए पैरोल बेल पर बाहर आ सकता है. हालांकि, इसके लिए कैदी को कोर्ट में अर्जी लगानी पड़ती है, ताकि वक्त पर इस सुविधा का लाभ उठाया जा सके. हालांकि, इस दौरान कैदी पर निगाह रखी जाती है. 

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परिवार से मिलने की सुविधा 

कैदियों को तय नियमों के हिसाब से अपने परिवार के सदस्यों और वकील से मिलने का अधिकार होता है. मुलाकात का समय जेल के नियमों के हिसाब से तय किया जाता है. इस दौरान कैदियों पर अच्छी खासी नजर रखी जाती है और अगर कोई खतरनाक कैदी है तो उसे नहीं मिलने दिया जाता.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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