बेटे की परवरिश पर बोले R Madhavan, बताया जब 5 साल के थे वेदांत तब भी उन्हें क्यों अडल्ट जैसा ही करते थे ट्रीट

R Madhavan On Parenting: आर माधवन के बेटे वेदांत माधवन स्विमर हैं और अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं. माधवन ने बताया उन्हें बेटे की परवरिश में क्या चैलेंजेस आए और उन्होंने हमेशा बेटे को क्या सिखाया है

R Madhavan Son

बेटे की प्रिविलेज पर माधवन ने कही यह बात. Image Credit - ANI

Parenting: बॉलीवुड के चॉक्लेट बॉय आर माधवन (R Madhavan) के बेटे वेदांत माधवन (Vedaant Madhavan) 2026 एशियन गेम्स में 12 मेंबर्स की स्विमिंग टीम को टू टाइम ओलंपियन श्रीहरि नटराज और साजन प्रकाश के साथ लीड करने वाले हैं. वेदांत माधवन उन सेलेब्रिटी किड्स की गिनती में आते हैं जिन्होंने अपनी पहचान एक्टिंग से अलग किसी करियर में बनाई है. अपने बेटे की परवरिश और वेदांत के लाइफस्टाइल के बारे में हाल ही में माधवन ने एक इंटरव्यू में कुछ इनसाइट्स दिए हैं. माधवन ने द हिंदू से बातचीत में बताया कि उनके लिए एक सेलेब्रिटी फादर होना कैसा है और किस तरह उन्होंने अपने बेटे की परवरिश की है.

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माधवन ने बेटे से कही यह बात

वेदांत के एक सेलेब्रिटी किड होने के चलते आर माधवन ने उन्हें हमेशा ग्राउंडेड रखने की कोशिश की है. माधवन ने बताया, “मैं एक सेलेब्रिटी हूं और वह एक सेलेब्रिटी चाइल्ड है. उसने अपनी भी ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं जिसने उसे मशहूर बनाया है, और यह इस तथ्य के साथ और बढ़ जाता है कि वह मेरा बेटा है. ज्यादातर, मैं उसे यह बताता हूं कि उसके पास एक आम बच्चे से ज्यादा मौके हैं क्योंकि लोग उसके बारे में जानते हैं, और वह अगर अपनी चीजों को ढंग से संभालना नहीं जानता है तो बहुत जल्दी चर्चा का विषय बन सकता है.”

अपने बेटे को ग्राउंडेड रखने को लेकर माधवान कहते हैं, “मैं उसे याद दिलाता रहता हूं कि यह दूसरों की वजह से मिली शोहरत है. कभी-कभी आपको उस अटेंशन की आदत हो जाती है. कई बार उसके साथ सेलेब्रिटी जैसा बर्ताव किया जाता है. मैंने कहा कि यह सब बहुत कम समय के लिए ही होगा. कभी-कभी व्यक्ति उस अटेंशन को वापस पाने के लिए बेवकूफी कर बैठता है.

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बेटे को अत्यधिक सुविधाएं मिलना भी चैलेंजिंग रहा

माधवन ने अपने पिता बनने के सफर के बारे में भी बताया और कहा कि पिता के तौर पर वे हर माता-पिता की तरह ही घबराते हैं और उनसे भी गलतियां हो सकती हैं. उन्होंने कहा, “हम हमेशा अपने बच्चे के लिए सबसे अच्छा चाहते हैं. ऐसा करने के लिए हम हर मुमकिन कोशिश करते हैं. लेकिन, हम यह भी जानना चाहते हैं कि कहां रुकना है. पेरेंटिंग कहां खत्म होती है और प्रिविलेज कहां शुरू होती है. मेरे लिए हर बार उस बारीक फर्क को समझना जरूरी होता है. कभी-कभी यही बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है. क्या मैं उसे उस सुविधा का फायदा उठाने दूं या उसे खुद जाकर अपने मेडल जीतने दूं. अगर मैं उस पर ज्यादा जोर डाल रहा हूं तो क्या मैं उसे खतरे में डाल रहा हूं या मैं वो कर रहा हूं जो असल में सही काम है. तो यह सवाल और डाउट्स यही पेरेंट होने का हिस्सा हैं.”

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हमेशा से बेटे को अडल्ट की तरह किया ट्रीट

बेटे को अडल्ट की तरह ट्रीट करने को लेकर माधवन बताते हैं, “वह 20 साल का है इसलिए अब लगभग एक वयस्क ही है. जब वह 5 साल का था तभी से मैंने उसके साथ एक वयस्क जैसा व्यवहार किया है. वह बच्चों की जिद या नखरे नहीं करता था. हम उससे उसकी राय पूछते थे और फिर उसे बताते थे कि हम उसका सुझाव क्यों नहीं मान रहे हैं. वह बात समझ जाता था.

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कैसा है बेटे का लाइफस्टाइल

माधवन ने बताया कि बेटे वेदांत का लाइफस्टाइल नियमानुसार चलता है. वेदांत एक स्पोर्ट्सपर्सन हैं और इसीलिए रात में 8 बजे सो जाते हैं और सुबह 4 बजे उठते हैं. माधवन कहते हैं, “वह अभी भी देश के लिए स्विमिंग कर रहा है. देश के पास उससे बेहतर कई तैराक हैं जिन्हें ज्यादा अटेंशन देने की जरूरत है और हम पूरी केोशिश करह रहे हैं कि देखें ऐसा कैसे हो सकता है.”

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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