कहीं आप भी तो नहीं कर रहे शर्मा जी के बेटे से अपने बच्चे को कंपेयर? जान लीजिए क्या हो सकता है असर

Parenting Tips: ऐसे बहुत से माता-पिता हैं जो अपने बच्चे को पड़ोसी के बच्चों से जरूर कम्पेयर करते हैं. किसी भी चीज हो, सभी में उनको नीचा दिखा देते हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि इसका आपके बच्चे पर क्या असर पड़ सकता है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं एक्सपर्ट रवी मलिक से.

कहीं आप भी तो नहीं कर रहे शर्मा जी के बेटे से अपने बच्चे को कंपेयर? जान लीजिए क्या हो सकता है असर
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Parenting Tips: ऐसे बहुत से बच्चे हैं जो अपने घर में रोजाना किसी न किसी बात को लेकर कंपेयर किए जाते हैं. कभी अपने से बड़े भाई-बहनों से तो कभी वे शर्मा जी के बच्चों से. जिसके चलते बच्चे अपने माता-पिता और घर वालों से दूर रहने लग जाते हैं. ऐसे बहुत से माता-पिता हैं जो अपने बच्चों को छोटी-छोटी चीजों को लेकर दूसरों से तुलना तो करते ही हैं, लेकिन ये नहीं समझते हैं कि इसका बच्चे पर क्या असर पड़ेगा. बच्चा कैसे महसूस करेगा? या बच्चे के मन में दिनभर क्या चलता रहेगा? अगर आप भी इन्हीं में से हैं, तो आइए जानते हैं एक्सपर्ट रवी मलिक से कि आपकी ये आदत बच्चे के स्वभाव (Effects Of Comparison On Child ) पर किस तरह असर डाल सकती है.

कभी न करें बच्चों को कंपेयर

एक्सपर्ट रवी मलिक के मुताबिक अगर आप रोजाना अपने बच्चे को दूसरों से कंपेयर (Comparison) करते हैं, तो इससे आपके बच्चे का कॉन्फिडेंस कमजोर हो जाता है. सेल्फ इस्टीम (Self- Esteem) कम हो जाती है, और ऐसे बच्चे इम्पोस्टर सिंड्रोम (Imposter Syndrome) के शिकार हो जाते हैं. जो कि बच्चों की सेहत और मेंटल स्टेट के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है. इतना ही नहीं, बच्चे के अंदर अपनी असफलता को लेकर फोबिया आ जाता है, एंजाइटी (Anxiety) की दिक्कत होने लगती है और जो इस उमर में जॉय ऑफ लर्निंग है, वह उनके मन और दिमाग से खत्म हो जाती है. जिससे बच्चा कुछ भी सीखने की चाह नहीं रखता है.

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कंपेयर करने से आपका बच्चा आगे चलकर काफी दिक्कत से जूझ सकता है. इससे बच्चे का आत्मविश्वास (Self Confidence) कम हो सकता है, जिससे बच्चा न ही खुलकर न किसी से बात करता है, न ही किसी की बातों का जवाब दे पाता है. इसके साथ ही आपका बच्चा सबसे अलग और अकेले भी रहना शुरू कर सकता है.

बच्चों को दें शहबाशी

एक्सपर्ट के अनुसार आपको अपने बच्चे को शहबाशी देनी चाहिए, चाहे बच्चा छोटा ही काम करे, आपको उसे प्रेज करना है, उसकी कोशिशों पर उसको सराहना है, ताकि बच्चा अपनी कोशिश को और अच्छे से कर सके. अगर आपका बच्चा शैतानी कर रहा है, तो आप उसको आराम से समझा भी सकते हैं क्योंकि बच्चों को डांट नहीं, प्यार की भाषा ज्यादा समझ आती है.

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हर बच्चे का होता है कंफर्ट एरिया

माता-पिता को ये बात समझनी चाहिए कि हर बच्चे का अपना एक कंफर्ट एरिया होता है. कुछ बच्चे डांस में अच्छे होते हैं, तो कुछ गाने, पेंटिंग, कैलकुलेशन, स्वभाव में. तो हर बच्चे का अपना कम्फर्ट एरिया होता है जिसमें वे माहिर होते हैं. इसलिए एक्सपर्ट रवी मलिक के मुताबिक किसी भी बच्चे को कंपेयर नहीं करना चाहिए.

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