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कान के अंदर जमा मैल कैसे निकालें? जानिए किस तरह Ear Wax नरम होकर आ जाएगी बाहर

Ear Wax Removal: कान में जमा गंदगी अगर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है तो इसे साफ करना जरूरी होता है. ऐसे में यहां जानिए किस तरह कान के मैल को घर पर ही साफ किया जा सकता है.

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क्या नारियल का तेल कान का मैल निकाल सकता है?

Kaan Ki Gandagi Kaise Nikale: कान में जमा मैल को साधारण भाषा में ठेक कहा जाता है. यह ठेक बढ़ने लगती है तो बहुत से लोगों को कान में खुजली, भारीपन और कम सुनाई देने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. कई लोग कान से मैल निकालने का तरीका नहीं जानते हैं और ना ही डॉक्टर के पास जाना चाहते हैं, ऐसे में वे अपने कानों को कभी किसी तिल्ली से तो कभी कॉटनबड्स या किसी नुकीली चीज से खुरचने लगते हैं. ऐसा करने पर कानों की अंदरूनी परत में छेद हो सकता है, गंदगी और गहरी जम सकती है और सुनने की क्षमता प्रभावित होती है. इसीलिए आप यह गलती ना करें. यहां जानिए किस तरह घर पर आसानी से और सेफ तरीके से कानों की गंदगी को साफ (Ear Wax Removal) किया जा सकता है.

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कानों की गंदगी कैसे करें साफ

पानी आएगा काम

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पानी को किसी बल्प सीरींज यानी ड्रॉप्स डालने वाली चीज से कानों में बूंद-बूंद करके डालें. हल्का गर्म या गुनगुना पानी (Lukewarm Water) कानों में डालें. सिर को एक तरफ झुकाने पर जो कान ऊपर होगा उसमें हल्का गर्म पानी डालकर कुछ देर रखें और उसके बाद कान को सीधा करके पानी को कान से निकाल दें. इसे 2-3 बार करने पर कान की गंदगी बाहर आती है. इसके बाद जरूरत पड़े तो कान को कपड़े से साफ कर लें.

तेल से नरम होगी गंदगी

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कान की सफाई में नारियल तेल, सरसों का तेल (Mustard Oil), बेबी ऑयल, बादाम का तेल या किसी और तेल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. कान में हल्के गर्म तेल की कुछ बूंदे डालें और 5 से 10 मिनट के बाद कान को नीचे झुकाकर तेल बाहर निकाल लें. किसी कपड़े से कानों की सफाई करने पर भी नरम हुआ मैल बाहर आ सकता है.

हाइड्रोजन पैरोक्साइड भी आ सकता है काम

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कानों की गंदगी निकालने के लिए हाइड्रोजन पैरोक्साइड का इस्तेमाल किया जा सकता है. हाइड्रोजन पैरोक्साइड की कुछ बूंदें कानों में डालें. इसे कुछ देर कानों में रखने पर कानों से फिजिंग जैसी आवाज आने लगेगी, ऐसा लगेगा जैसे अंदर बुलबुले बन रहे हैं. इसके बाद कान को उलटा करके इस लिक्विड को कान से बाहर निकाल लें. कुछ दिन यह नुस्खा आजमाने पर असर दिखता है.

क्या कान की गंदगी निकालना बहुत जरूरी है?

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नहीं, कान की गंदगी निकालना बहुत जरूरी नहीं है. अगर यह गंदगी बाहर आने लगी है या फिर आपको इससे सुनने में दिक्कत या कोई असहजता होती है तो गंदगी को साफ कर सकते हैं. इसके अलावा, गंदगी को ना भी निकाला जाए तो नुकसान नहीं होता है. कान के ठेक में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं जो कान को हेल्दी रखने में मदद कर सकते हैं. अगर आप कान साफ नहीं कर पा रहे हैं तो ENT से कान साफ करवा सकते हैं. खुद से कान में किसी तरह का टूल ना डालें.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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