मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के कारण कई देश ईंधन और गैस की कमी से जूझ रहे हैं, जिनमें भारत का नाम भी शामिल है. जहां पहले लोगों को एक बुकिंग में सिलेंडर मिल जाता है, बिना किसी दिक्कत के, आज हालात यह है कि लोगों को घंटों लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है, वहीं कई लोग ब्लैक में महंगे सिलेंडर खरीद रहे हैं, तो कई लोगों के पास खाना बनाने के लिए गैस ही उपलब्ध नहीं है. ऐसे में लोगों का सहारा बना है इंडक्शन चूल्हा, जिसे इस्तेमाल करने के लिए किसी भी तरह की गैस की जरूरत नहीं होती और वह जरूरत के अनुसार खाना पका देता है. हालांकि, इसे लेकर लोगों के मन में सवाल रहता है कि बिना आग की मदद के बिजली से पका खाना क्या सेहत के लिए अच्छा है या नहीं? आइए जानते हैं आपके सवाल का सीधा जवाब.
इंडक्शन चूल्हे की बढ़ती मांग के बीच डर का माहौल Induction Chulha Ko Lekar Logo Mein Darr
इंडक्शन चूल्हे में एक तरफ जहां लोगों का खाना बनाना आसान कर दिया है और गैस पर निर्भरता कम की है. वहीं, इस बिजली से चलने वाले चूल्हे को लेकर लोगों के दिल में कई तरह का डर भी देखने को मिल रहा है. कई लोगों के बीच ये बात सुनने को मिली है कि इंडक्शन चूंकि बिना आग के बिजली की मदद से खाना बनाता है, तो इसे खाने से शरीर में कई तरह की बीमारियों के पैदा होने या बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है. इस तरह के दावों में कितनी सच्चाई है, इसे जानना बेहद जरूरी है.
इंडक्शन चूल्हे पर पका खाना सेहत के लिए सुरक्षित है? Induction Cooktops Kitne Safe Hai
विज्ञान की दृष्टि से देखें तो इंडक्शन खाना पकाना पूरी तरह सुरक्षित है. यह चूल्हा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी का इस्तेमाल करता है जो सीधे बर्तन को गर्म करती है, जिससे खाना गैस की तुलना में ज्यादा तेजी से पकता है. दरअसल, लोगों के बीच अफवाह का कारण इंडक्शन चूल्हे में इस्तेमाल होने वाला रेडिएशन को लेकर होती है. बता दें कि वैज्ञानिक रिपोर्ट्स बताते हैं कि इंडक्शन चूल्हे से निकलने वाली तरंगे ‘नॉन-आयनाइजिंग’ होती हैं, जो मोबाइल फोन या वाई-फाई के जैसे ही सुरक्षित मानी जाती हैं. ये तरंगे सिर्फ बर्तन के संपर्क में आने से एक्टिव होती हैं और भोजन के आणविक ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचातीं.
इस कारण बिगड़ सकती है तबीयत Induction Cooking Health Myths
इंडक्शन पर खाना पकाते वक्त इस बात का जरूर ध्यान रखें कि चुनाव किया गया बर्तन इंडक्शन के मतलब का हो. यानी सिर्फ ‘फेरोमैग्नेटिक’ (चुंबकीय) आधार वाले स्टेनलेस स्टील या लोहे के बर्तन ही इस पर प्रभावी होते हैं. खराब क्वालिटी वाले बर्तन प्लास्टिक या असुरक्षित कोटिंग वाले बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा तापमान पर वे रसायन छोड़ सकते हैं, जिससे सेहत खराब हो सकती है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.