भारतीय रसोई में दालचीनी न हो ऐसा मुमकिन ही नहीं है, खाने का स्वाद बढ़ाने से लेकर कई घरेलू उपायों में इसका खास इस्तेमाल किया जाता है. खुशबूदार लकड़ी की छाल, दिखने में भले ही आम लगे, लेकिन इसका खाना बनाने में अहम भूमिका निभाता है, खासतौर से बिरयानी, कोरमा आदि में इसके बिना स्वाद ही नहीं आता है. लेकिन अब हम आपको जो खबर बताएंगे, उसे जानने के बाद आपको भी चिंता होने लगेगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्केट में अब कैसिया को भी दालचीनी के नाम पर बेचा जा रहा है. दोनों दिखने में एकदम एक जैसे लगते हैं, यहीं कारण है कि अक्सर लोग धोखा खाकर सही दालचीनी नहीं खरीद पाते हैं. हम आपको इस स्टोरी में दोनों के बीच कैसे फर्क पहचानें इसको लेकर आसान टिप्स देंगे, जो आपके काफी काम आ सकता है.
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हमेशा ऐसी दालचीनी खरीदें
मार्केट में जब भी आप दालचीनी खरीदने जाएं, तो पाउडर न लें, क्योंकि इसमें अन्य केमिकल वाली तत्व भी मिलाएं जा सकते हैं. बेहतर रहेगा कि आप साबुत दालचीनी खरीदें. खरीदते वक्त सबसे पहले उसे हाथ में लेकर जरूर देखें. अगर छाल बहुत मोटी और भारी लगे, तो थोड़ा जांच जरूर कर लें, ताकि आप अपने घर सही चीज लेकर जाएं. आपको बता दें कि दालचीनी और कैसिया के बीच सबसे आसानी से दिखने वाला फर्क उनके टेक्सचर (बनावट) में होता है. कैसिया की छाल आम तौर पर मोटी, खुरदरी और दालचीनी के मुकाबले थोड़ी सख्त होती है; इसे तोड़ना भी थोड़ा मुश्किल हो सकता है. वहीं, असली दालचीनी पतली और हल्की होती है. इसलिए, खरीदारी करते समय सिर्फ छाल के रंग के आधार पर फैसला न करें, इसकी मोटाई और परतों पर ध्यान दें.
खुशबू से पहचान करें कौन सी है दालचीनी?
असली दालचीनी को उसकी खुशबू से भी पहचाना जा सकता है. गीला होने पर, असली दालचीनी से तीखी या तेज गंध के बजाय एक मीठी, गर्म और प्राकृतिक खुशबू आती है. चाय या दूध में अगर इसे मिलाया जाए, तो इसे चाय में हल्की मिठास और गर्माहट आ जाती है, साथ ही इसका मसालेदार स्वाद और खुशबू भी साफ तौर पर महसूस होती है. लेकिन अगर आपको स्वाद बहुत बहुत ज्यादा तेज लगे या आपको सिर्फ तीखापन महसूस हो, तो सावधान हो जाएं, ये असली दालचीनी हो ऐसा जरूरी नहीं.
दालचीनी और कैसिया के बीच फर्क जानना क्यों जरूरी?
आपके लिए ये छोटी समस्या हो सकती है, लेकिन अगर आपको अपनी सेहत से प्यार है, तो दोनों के बीच फर्क जरूर जान लें. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्केट में दोनों ही मिलते हैं, लेकिन सेहत पर दोनों का असर एकदम अलग-अलग होता है. सीलोन दालचीनी और कैसिया में कौमारिन की मात्रा अलग-अलग होती है. कैसिया में कौमारिन की मात्रा ज्यादा होती है, जबकि सीलोन दालचीनी में इसकी मात्रा बहुत कम होती है. अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक और ज्यादा मात्रा में कौमारिन का सेवन करता है, तो इससे उसके लिवर को नुकसान पहुंच सकता है.
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