Desi Cow Milk And Ghee: देसी गाय A2 दूध देती हैं जो सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है. वहीं, इन गायों के गोबर का अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है जिनमें खाद से लेकर ईंटे बनाना तक शामिल है. पतंजलि गौशालाओं में भी देसी गायों का पालन होता है जहां गायों के भरण-पोषण का विशेष ख्याल रखा जाता है. इन गायों के दूध और घी को सेहत के लिए बेहद अच्छा माना जाता है. ऐसे में आप भी जानिए देसी गाय (Desi Cow) के घी और दूध से कौन-कौन सी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर रहती हैं. साथ ही जानिए देसी गायों का गोबर किस-किस तरह से काम आता है.
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देसी गाय का दूध पीने के फायदे
- देसी गाय के दूध में पाए जाने वाले गुण पेट की सेहत को अच्छा रखते हैं. इस दूध में A2 बीटा-केसीन प्रोटीन होता है जो आसानी से ब्रेक डाउन हो जाता है और पचाने में आसान है.
- इस दूध में कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन डी की भरपूर मात्रा होती है जिससे हड्डियों की सेहत अच्छी रहती है और हड्डियों के रोग दूर रहते हैं.
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी इस दूध के फायदे नजर आते हैं. देसी गाय का दूध पोषक तत्वों से भरपूर होने के चलते इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में फायदा देता है.
- दिमाग की सेहत के लिए भी यह दूध बेहद अच्छा होता है. ऐसे में देसी गाय का दूध पीने पर फायदा मिलता है.
- इस दूध में प्रोटीन और विटामिन की मात्रा भी भरपूर होती है. ऐसे में गाय का दूध एनर्जी से भरपूर होता है.
- गाय के दूध में A2 बीटा-केसीन होता है जिससे इंफ्लेमेशन भी कम होती है. ऐसे में बाउल डिजीज को कम करने में यह दूध असरदार साबित होता है.
देसी गाय का घी खाने के फायदे
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- देसी गाय का घी विटामिन ए, डी, ई और के से भरपूर होता है. इस घी में एंटी-ऑक्सीडेंट्स की भी अच्छी मात्रा होती है.
- इस घी को खाने पर पाचन अच्छा रहता है, आंतों की दीवारों को मजबूती मिलती है और डाइजेस्टिव एंजाइम्स स्टिम्यूलेट होते हैं. इससे कब्ज की परेशानी दूर होती है.
- देसी गाय का घी (Desi Cow Ghee) खाने पर आंतें इस घी में मौजूद पोषक तत्वों को बेहतर तरह से सोख पाती हैं.
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने भी इस घी का असर दिखता है.
- देसी गाय का घी रक्त धमनियों में जमे प्लाक को कम करता है और कॉलेस्ट्रोल को पिघलाकर शरीर से बाहर निकालता है. इससे दिल की सेहत भी अच्छी रहती है.
- देसी गाय के घी को त्वचा और बालों पर लगा सकते हैं. यह घी नेचुरल मॉइस्चराइजर की तरह काम करता है.
- इस घी के सेवन से ब्रेन हेल्थ अच्छी रहती है और साथ ही हड्डियों को भी इस घी के फायदे मिलते हैं.
- देसी गाय के घी में A2 बीटा-कैसीन प्रोटीन होता है जिसे पचाना आसान होता है और यह मिक्सड दूध या दूसरी गायों के दूध से बनने वाले घी से बेहतर होता है.
पतंजलि गौशाला में मौजूद हैं ये गायें
बाबा रामदेव बताते हैं कि पतंजलि की देसी गायों की गौशाला में गौसेवा के साथ ही कुदरती खेती और दूसरे ग्रामीण कामों के लिए इन गायों का इस्तेमाल होता है. ये सभी गायें देसी नस्ल की हैं जिनमें पुंगनूर, साहीरवाल, थापारकर और हरियाणवी नस्ल की भी गायें हैं. इनमें ऐसी भी कई गाय हैं जो 20 से 25 किलो तक दूध भी देती हैं. इन्हीं गायों का दूध पतंजलि गुरुकुलम और आचार्यकुलम के बच्चों को पिलाया जाता है.
पतंजलि की गौशाला में साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है. गाय जैसे ही गोबर करती है तुरंत उसे उठाया जाता है और तुरंत पानी से सफाई की जाती है. वहीं, गाय के बैठने के लिए अलग जगह है.
पतंजलि गौशाला क्या काम करता है
देश के अलग-अलग हिस्सों में पतंजलि की गौशालाएं हैं. पतंजलि गौशाला बहादुरपुर सैनी, संत कुटीर गौशाला, गौशाला योग ग्राम और गौशाला पतंजलि वेलनेस में कई तरह के कामों के लिए गायों का इस्तेमाल होता है. पतंजलि में गौशाला के गोबर से हवनकुंड की सामग्री बनाई जाती है. गौशालाओं में गोबर से समिधा बनाई जाती है, खाद बनाई जाती है, गोबर से ही सलरी भी तैयार की जाती है और गोधन अर्क से ही गोनाइल बनाया जाता है. गौशालाओं में ही गोबर गैस प्लांट बनाया गया है. इसके अलावा किसी और गैस का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. वहीं, गोबर के इस्तेमाल से ही ऑर्गेनिक खेती की जाती है और एक एकड़ में 3 से 5 लाख रुपए की शाक-सब्जियां और फल उगाए जाते हैं.
पतंजलि गौशाला में मिट्टी, चूना और गोबर को मिलाकर ही ईंटे भी तैयार की जाती हैं. बाबा रामदेव का कहना है कि यह एक नया फॉर्मुला है जिसका सभी इस्तेमाल कर सकते हैं.
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