बच्चों को दवा पिलाने में जरूर बरतें ये 4 सावधानियां, डॉक्टर ने सभी पैरेंट्स को दी सलाह

Medicine For Children: माता-पिता अक्सर ही बच्चे को दवाई देने में कुछ आम सी गलतियां कर देते हैं जिनसे बच्चे की सेहत प्रभावित होती है और दवाई का असर भी कम हो सकता है. ऐसे में यहां जानिए बच्चों के डॉक्टर कौन सी जरूरी सावधानियां बरतने के लिए कह रहे हैं.

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बच्चे को दवाई देने में कभी ना करें ये गलतियां. Image Credit - Pexels

Parenting Tips: बड़े अपनी दवाइयों का ध्यान रखते हैं और दवाई (Medicine) कैसे खानी है, कब खानी है और किस तरह खानी है यह जानते हैं. लेकिन, बात जब बच्चों की आती है तो दवाई की पूरी जिम्मेदारी माता-पिता की हो जाती है. अगर दवाई पिलाने में थोड़ी सी भी गड़बड़ की जाए तो इससे बच्चे की सेहत बिगड़ते देर नहीं लगती है. इसीलिए बच्चे को दवाई पिलाते हुए माता-पिता को कुछ जरूरी बातें ध्यान में रखना जरूरी है. इस बारे में बता रहे हैं बच्चों के डॉक्टर यानी पीडियाट्रिशियन डॉ. संदीप गुप्ता. डॉक्टर ने ऐसी 4 गलतियों का जिक्र किया है जो बच्चे को दवाई पिलाते हुए अक्सर ही पैरेंट्स कर देते हैं. आइए जानते हैं इन मिस्टेक्स के बारे में.

बच्चे को दवाई पिलाते हुए ना करें ये गलतियां

पुरानी दवाई पिलाना

बच्चे को दवाई पिलाते हुए सबसे बड़ी गलती माता-पिता यह करते हैं कि वे एक ही दवाई का कई-कई दिनों तक इस्तेमाल करते रहते हैं. लेकिन, डॉक्टर का कहना है कि दवाई खोलने के एक घंटे बाद ही उसका इस्तेमाल करना चाहिए. पैरेंट्स को लगता है कि दवाई खोलने के बाद उसकी एक्सपायरी डेट (Expiry Date) तक उसे इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन यह दवाई ना खुलने तक उसकी शीशी की एक्सपायरी डेट है. दवाई की शीशी एक बार खुल गई है तो एक महीने तक ही उसका इस्तेमाल करें. पुरानी दवाई पिलाने पर दवाई का असर नहीं होगा.

दवाई की स्ट्रेंथ ना देखना

दवाई की स्ट्रेंथ पढ़ना जरूरी है. पैरासीटामोल की ही बात की जाए तो किसी शीशी में 250 एमजी कैलपल और किसी में 150 कैल्पल हो सकता है. इसीलिए दवाई की स्ट्रेंथ देखकर ही बच्चे को दवाई की डोज देनी चाहिए.

शीशी को शेक ना करना

बच्चे को जब भी दवाई दें तो इस बात का ध्यान रखें कि लक्विड दवाई हमेशा अच्छी तरह शेक करके दी जाए. अगर दवाई शेक करके नहीं दी जाएगी तो उससे शीशी का लिक्विड और दवाई मिक्स नहीं होंगें. इससे ही बच्चे को सही मात्रा में दवाई मिलेगी नहीं तो आप गलती से उसे डाइल्यूट दवाई दे देंगे.

2 दवाइयां देने का गलत तरीका

एक समय पर 2 दवाई बच्चे को दी जा रही है तो दोनों दवाइयों के बीच 10 से 15 मिनट का गैप रखें. कई बार पैरेंट्स बच्चे को 2 दवाइयां एकसाथ दे देते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे दवाई के प्रभाव पर असर पड़ता है.

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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