Personality Development: व्यक्ति अक्सर ही खुद को भीड़ में सबसे पीछे पाता है. इसका कारण कोंफिडेंस की कमी होता है. लेकिन, यह कोंफिडेंस कम कैसे होता है? आत्मविश्वास में कमी (Low Confidence), शांति छिन जाना और ऐसा महसूस होना कि सबकुछ खराब हो रहा है आपकी खुद की गलतियों के कारण हो सकता है. ओनकोलॉजिस्ट डॉ. सन्नी गर्ग ने अपने इंस्टाग्राम हैडल से इस पोस्ट को शेयर किया है जिसमें वे बता रहे हैं कि आपकी कौन सी आदतें असल में कोंफिडेंस को कम करने वाली गलतियां साबित होती हैं. इन गलतियों से बचकर ही आप एकबार फिर कोंफिडेंट बन सकेंगे और शांत महसूस कर सकेंगे.
कोंफिडेंस को कम करती हैं आपकी ये आदतें
बीते हुए कल का अफसोस – जो बीत गया है उसपर बार-बार अफसोस ना करें अफसोस करते रहने से जो हो गया है वो बदलेगा नहीं. यह सेल्फ टॉर्चर जैसा होता है. आपने उससे सीख लिया काफी है, आपको खुद को इस तरह सजा देते रहने की जरूरत नहीं है.
भविष्य की हर समय चिंता- भविष्य की हर समय टेंशन ना लेते रहें. आप जो कुछ सोचते हैं कि ऐसा होगा या वैसा होगा, उनमें से 90 प्रतिशत चीजें होती ही नहीं हैं. लेकिन, इससे आपका कोर्टिसोल बढ़ता रहता है और नींद में कमी आने लगती है, फोकस क्रैश होता है और मूड खराब रहने लगता है.
दूसरों में खुशियां ढूंढना – व्यक्ति को किसी दूसरे व्यक्ति में अपनी खुशियां नहीं ढूंढनी चाहिए. आपको यह समझना जरूरी है कि लोग सपोर्ट सिस्टम होते हैं, लाइफ सिस्टम नहीं. अगर आपकी खुशी किसी और के व्यवहार पर निर्भर करती है तो आप इमोशनल EMI पर जी रहे हैं.
अपनी स्ट्रेंथ को कम समझने की गलती – अपनी स्ट्रेंथ को अंडरएस्टिमेट ना करें. यह समझें कि आप कमजोर नहीं हैं बल्कि आप बस थके हुए हैं. फर्क समझना सीखें.
तुलना करना बंद करें – अपनी जिंदगी की किसी और व्यक्ति की जिंदगी से तुलना करना बंद करें. कंपेरिजन आपके कोंफिडेंस को नहीं बल्कि आइडेंटिटी यानी आपकी पहचान को मारता है.
टू लेट कहना छोड़ें – हर बात में यह कहना छोड़ दें कि बहुत देर हो गई है या इट्स टू लेट. कुछ भी लेट नहीं होता है. यह फैक्ट नहीं है बल्कि बहाना है.
सेहत का ध्यान ना रखना – अगर आपका शरीर आपको किसी तरह के संकेत दे रहा है या किसी समस्या के लक्षण नजर आने लगे हैं तो उन्हें इग्नोर ना करें. अपनी सेहत को हल्का लेने की आदत छोड़ दें. इससे बीमारी बढ़ती जाती है.
ऑटोपायलट मोड में जीना छोड़ दें – ऑटोपायलट मोड कंफर्टेबल होता है इसीलिए खतरनाक भी होता है. इसमें आपकी किसी तरह ग्रोथ नहीं होती, आप आगे नहीं बढ़ रहे होते और ना आप अपग्रेड कर रहे होते हैं.
ओवरथिंक करना – अपने हर फैसले को ओवरथिंक करना गलत है. ओवरथिंक करने से क्लैरिटी नहीं आती बल्कि चीजें डिले होती हैं. क्लैरिटी एक्शन से आती है ओवरथिंकिंग से नहीं.
खुद को डाउट करना – यह ना सोचें कि आप कमबैक नहीं कर सकते या चीजों को पहले जैसा बेहतर नहीं कर सकते. अपनी नींद को ठीक करें, एक्सरसाइज करें, पैसों को मैनेज करें. आप कमबैक कर लेंगे.
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