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Neem Karoli Baba: खुशी, दुख और क्रोध में न करें ये 3 काम, जिंदगी बदल देगी नीम करोली बाबा की ये सीख

Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा ने सिखाया है कि खुशी, दुख और क्रोध के समय मनुष्य अहंकार, अविवेक और आवेश में होता है. इसलिए इस समय किसी भी इंसान को भावनाओं में बहकर निर्णय लेने और 3 काम से बचना चाहिए. आइए जानते हैं, क्या हैं ये 3 काम कौन-से हैं?

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Neem Karoli Baba Teachings:उत्तर प्रदेश के एक साधारण परिवार में जन्मे नीम करोली बाबा आधुनिक भारत के प्रसिद्ध संत माने जाते हैं. उनका असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है. बाद में वे आध्यात्मिक जीवन की ओर मुड़ गए. उत्तराखंड के कैंची धाम आश्रम ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. उनके भक्त मानते हैं कि बाबा ने अनेक चमत्कार किए. कहा जाता है कि वे बिना साधनों के दूर की घटनाएं जान लेते थे. कई लोग उन्हें हनुमान भक्त संत के रूप में पूजते हैं. भारत ही नहीं, अमेरिका और यूरोप तक उनके शिष्य फैले. एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग जैसे नाम भी उनके आश्रम से जुड़े बताए जाते हैं. आज भी लाखों लोग उनके विचारों से प्रेरणा लेते हैं.

छोटी आदतें, बड़ा असर

बाबा का मानना था कि जीवन बदलने के लिए बड़ी बातों से पहले छोटी आदतों को सुधारना जरूरी है. वे कहते थे कि इंसान अपनी रोज की सोच और व्यवहार से अपना भविष्य बनाता है. उनकी सीख सीधी थी. मन को संभालो. शब्दों को संभालो. फैसलों को संभालो.

क्रोध में जवाब न दें

अक्सर गुस्से में हम वह बोल देते हैं जो दिल में नहीं होता. बाद में पछतावा होता है. रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं. बाबा की सीख थी कि क्रोध के समय चुप रहना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है. उस पल खुद को रोक लेना कई टूटते संबंध बचा सकता है. गुस्सा शांत होने के बाद कही गई बात ज्यादा असरदार होती है.

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खुशी में वादा न करें

बहुत ज्यादा खुशी भी कई बार समझ को कमजोर कर देती है. उस समय किया गया वादा बोझ बन सकता है. बाबा कहते थे कि उत्साह में लिया गया निर्णय बाद में परेशानी दे सकता है. इसलिए जब मन बहुत प्रसन्न हो, तब भी संतुलन जरूरी है. हर वादा सोच समझकर करें.

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दुख में फैसला न लें

दुख के समय मन भारी होता है. सोच साफ नहीं रहती है. ऐसे में लिया गया निर्णय अक्सर गलत दिशा देता है. बाबा ने अपने उपदेश में कहा था कि जब तक मन शांत न हो, तब तक बड़े फैसले टाल देना बेहतर है. धैर्य रखना भी साधना का हिस्सा है.

दुनिया भर में प्रभाव

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम आज एक विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है. हर साल हजारों लोग वहां पहुंचते हैं. सोशल मीडिया के दौर में भी उनके विचार तेजी से फैल रहे हैं. उनकी शिक्षाएं जटिल नहीं हैं. वे जीवन के साधारण नियमों की याद दिलाती हैं. गुस्सा रोको. खुशी में संभलो. दुख में ठहरो. यही तीन बातें जीवन को नई दिशा दे सकती हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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