भारतीय मुद्रा यानी रुपये (INR) के लिए आज का दिन काफी दबाव भरा साबित हो रहा है। मंगलवार सुबह शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 93.28 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों से जारी वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये की कमर तोड़ दी है।

कल यानी सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप के बाद रुपया 92.90 पर बंद हुआ था, लेकिन आज सुबह बाजार खुलते ही यह 17 पैसे टूटकर 93.05 पर खुला और देखते ही देखते 93.28 के स्तर तक जा गिरा।

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रुपये की गिरावट के पीछे 4 बड़े कारण

डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को डेडलाइन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को मंगलवार रात 8 बजे (EDT) तक की मोहलत दी है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को वैश्विक तेल व्यापार के लिए खोल दे। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो ईरान के ऊर्जा संसाधनों और पावर प्लांट्स को निशाना बनाया जाएगा। इस तनाव ने दुनिया भर के निवेशकों को डरा दिया है, जिससे सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग (Demand) अचानक बढ़ गई है।

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कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उबाल
भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। जब भी तेल महंगा होता है, भारत को भुगतान करने के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे रुपये की वैल्यू कम हो जाती है और देश का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने का खतरा रहता है।

विदेशी निवेशकों (FII) का पलायन
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। सोमवार, 6 अप्रैल को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से ₹8,167 करोड़ की भारी-भरकम निकासी की। इस साल अब तक विदेशी निवेशक करीब 16 बिलियन डॉलर भारतीय बाजार से निकाल चुके हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

डॉलर इंडेक्स में मजबूती
वैश्विक स्तर पर डॉलर अन्य मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हो रहा है। ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स के अनुसार, डॉलर 0.09% की बढ़त के साथ 100.07 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जब डॉलर ग्लोबल मार्केट में मजबूत होता है, तो उभरते बाजारों (जैसे भारत) की मुद्राएं कमजोर होने लगती हैं।

RBI की कोशिशें: क्या संभलेगा रुपया?
रुपये की गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में बैंकों की ओपन पोजीशन पर 100 मिलियन डॉलर की सीमा तय की है ताकि मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी (Speculation) को कम किया जा सके। RBI की कार्रवाइयों ने रुपये को और ज्यादा गिरने से रोकने में स्थिरता प्रदान की है। हालांकि, सतह के नीचे दबाव अभी भी बना हुआ है। जब तक कच्चा तेल $100 के नीचे नहीं आता और ग्लोबल तनाव कम नहीं होता, रुपया दबाव में रहेगा।

आम आदमी पर क्या होगा असर?
महंगाई:
रुपया कमजोर होने से आयात (Import) महंगा हो जाता है, जिससे मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं।

विदेश यात्रा और पढ़ाई: अगर आप विदेश घूमने या पढ़ाई के लिए जाने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे।

पेट्रोल-डीजल: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर रुपये के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की उम्मीद फिलहाल धूमिल दिख रही है।