Ayodhya Ram Mandir Pran Patishtha Will BJP get votes in 2024 Loksabha Election: 'राम मंदिर में भगवान राम के विराजमान के बस कुछ ही दिन बचे हैं। भगवान राम बस आने ही वाले हैं...।' दिल्ली दशहरे में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ये बातें कही थीं। मौका भले ही दशहरा पर्व का था, लेकिन इसका संदेश 2024 के चुनाव पर गहरी छाप छोड़ने वाला है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 22 जनवरी को पीएम मोदी अयोध्या में भगवान रामलला की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा करेंगे। इसके साथ ही देश के 5 लाख से अधिक मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होंगे। इसी दिन शाम शाम को दिवाली की तरह घर-घर दीप जलाए जाएंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राम मंदिर मुद्दे पर 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट मिलेंगे? क्या हिंदुत्व के मुद्दे पर भारी पड़ेगी जाति? विपक्ष के मुद्दे कितना प्रभावी होंगे? एक रिपोर्ट...

पहले समझिए कैसे भाजपा ने पिछले दो चुनावों में राम मंदिर को भुनाया?

भाजपा के 2 सीटों से 303 सीटों तक पहुंचने में राम मंदिर एक अहम मुद्दा रहा है। 1984 में भाजपा को महज 2 सीटें मिली थीं, वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले 303 सीटें हासिल की। लेकिन बीते दो चुनाव भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि रहे। 2014 का चुनाव राम मंदिर मुद्दे पर लड़ा। आखिरकार जनता ने जीत का सेहरा बांधा। इसके बद जब 2019 में मंदिर के निर्माण का रास्ता न्यायालय से खुला तो फिर भाजपा को जनता ने प्रचंड बहुमत दिया। 2019 में सरकार ने बिना कोई सांप्रदायिक तनाव के सुप्रीम कोर्ट की मदद से राम मंदिर आंदोलन को अंतिम परिणाम तक पहुंचाया। इसके तुरंत बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का निर्माण राम मंदिर के निर्माण का रास्ता खोला।

2014 के चुनाव का परिणाम

दल                              सीट एनडीए                         336 यूपीए                            59 अन्य                            148

2019 के चुनाव का परिणाम

दल                             सीट एनडीए                       353 यूपीए                          91 अन्य                           98

क्या 2024 में राम मंदिर के नाम पर वोट मिलेगा?

अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन से लेकर राम मंदिर के निर्माण के गवाह सीनियर जर्नलिस्ट वीएन दास का कहना है कि कांग्रेस ने राम मंदिर का ताला खुलवाया था। लेकिन उसके बाद कांग्रेस इस मुद्दे से विमुख हो गई। भाजपा ने इस मुद्दे को कैच किया और हिंदुत्व-राष्ट्रवाद का झंडाबरदार खुद को बनाया। समाज का एक बड़ा वर्ग है, जिसकी संवेदनाएं अभी भी भगवान राम और भाजपा के प्रति है। वे निश्चित तौर पर भाजपा को वोट करेंगे। उन्होंने कहा कि रही बात युवा वोटर्स की तो इस समय विपक्ष के पास कोई विश्वसनीय या जमीनी नेता मौजूद नहीं है। भाजपा ने राम मंदिर उद्घाटन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कार्ययोजना तैयार की है। इसका फायदा जरूर चुनाव में मिलेगा। हालांकि कितना मिलेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।

क्या हिंदुत्व पर भारी पड़ेगा जाति जनगणना का मुद्दा?

बिहार में सीएम नीतीश कुमार जातिगत जनगणना करा चुके हैं। बिहार के बाद महाराष्ट्र में एनसीपी नेता और सरकार में डिप्टी सीएम अजित पवार भी कह चुके हैं कि राज्य में जाति जनगणना होनी चाहिए। इससे जातियों का सटीक आंकड़ा सामने होगा और योजनाएं बनाने में सहूलियत मिलेगी। यूपी में अखिलेश यादव भी लगातार जातिगत जनगणना की पैरवी कर रहे हैं। भाजपा ने अपना स्टैंड क्लियर करते हुए कह दिया है कि वह जातिगत जनगणना के खिलाफ है। खुद पीएम मोदी भी इसके खिलाफ बयान दे चुके हैं। भाजपा जातियों की बात न करके हिंदुत्व की बात कर रही है। फिलहाल चुनाव में हिंदुत्व बनाम जाति का मुद्दा विपक्ष के लिए बड़ा दांव बन सकता है। यह भी पढ़ें: देश में दिल्ली की हवा सबसे खराब, AQI का पैरामीटर हुआ फेल, टूटा दो सालों का रिकॉर्ड