रम पसंद करने वालों के बीच ओल्ड मोंक एक बेहद लोकप्रिय ब्रांड माना जाता है. इस मशहूर शराब को मोहन मीकिन कंपनी द्वारा तैयार किया जाता है. इस ब्रांड को शुरू करने का श्रेय कर्नल वेद रतन मोहन को जाता है. वे यूरोप के बेनेडिक्टिन संतों की जीवनशैली और उनके शराब बनाने के तरीके से काफी प्रभावित थे. इन्हीं संतों के सम्मान में उन्होंने इस रम का नाम ओल्ड मोंक रखा था. बेनेडिक्टिन संत ईसाई धर्म के संत बेनेडिक्ट के अनुयायी माने जाते हैं. यूरोप में वाइन और अन्य पेय पदार्थ बनाने की परंपरा में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है.

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किस चीज से बनती है ओल्ड मोंक?

ओल्ड मोंक एक गहरे रंग की डार्क रम है, जिसे मोलासिस यानी गन्ने के शीरे से बनाया जाता है. गन्ने से चीनी बनाने के दौरान बचने वाले गाढ़े तरल पदार्थ को मोलासिस कहा जाता है. इसे पहले फर्मेंट किया जाता है और फिर डिस्टिलेशन तकनीक से अल्कोहल तैयार होता है. इसके बाद तैयार स्पिरिट को 7 सालों तक ओक की लकड़ी से बने बैरल में रखा जाता है. इसी लंबी प्रक्रिया के कारण रम को उसका गहरा भूरा रंग और खास स्वाद मिलता है. इसमें वैनिला, कैरेमेल और चॉकलेट जैसा मीठा फ्लेवर महसूस होता है.

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क्या है लेबलिंग से जुड़ा विवाद?

हाल ही में फूड सेफ्टी अथॉरिटी FSSAI ने ओल्ड मोंक के तीन वेरिएंट्स पर प्रतिबंध लगा दिया है. इनमें द लेजेंड, गोल्ड रिजर्व और XXX मैच्योर्ड रम शामिल हैं. एजेंसी का आरोप है कि इन प्रोडक्ट्स की बोतल पर उम्र से जुड़े दावे नियमों के मुताबिक नहीं थे. जांच में पाया गया कि सात साल पुरानी बताई गई रम में असली रम स्पिरिट का हिस्सा 5 प्रतिशत से भी कम था. बाकी हिस्सा बिना मैच्योरिटी वाले न्यूट्रल स्पिरिट का था. नियमों के अनुसार गलत जानकारी देने की वजह से इन वेरिएंट्स पर यह कानूनी कार्रवाई की गई है.

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