देश में बीते कुछ सालों में कई राज्यों के नामों को बदला गया है. वहीं, आज केरल का नाम बदलने की मंजूरी मोदी कैबिनेट की ओर से दे दी गई है. जिसके बाद अब ये बिल लोकसभा में पेश होगा और फिर ये बिल राज्यसभा में जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राज्य का नाम बदलने का अधिकार किसके पास होता है.
कैसे बदला जाता है किसी राज्य का नाम?
केंद्र सरकार को अगर राज्य का नाम बदलना होता है तो उन्हें संविधान के नियमों का पालन करना होता है. बता दें कि किसी भी राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया विधानसभा या फिर संसद से शुरू होती है. जैसे अगर किसी राज्य की सरकार अपने राज्य का नाम बदलना चाहती है तो सरकार को विधानसभा में प्रस्ताव पारित करना होता है. जिसके बाद इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा जाता है. इसके बाद केंद्र सरकार तय करती है कि राज्य का नाम बदलेगा या नहीं. अगर केंद्र सरकार मंजूरी देती है, तो केंद्र के निर्देश पर गृह मंत्रालय, इंटेलिजेंस ब्यूरो, भारतीय सर्वेक्षण, डाक विभाग और रजिस्ट्रार जनरल समेत कई एजेंसियों से भी एनओसी लेना अनिवार्य होता है.
कौन बदल सकता है राज्य का नाम?
भारतीय संविधान के मुताबिक देश की संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने का अधिकार है. भारत का संविधान अनुच्छेद 3 संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने की शक्ति प्रदान करता है. जानकारी के लिए बता दें कि संविधान का अनुच्छेद 3 किसी राज्य के क्षेत्र, सीमाओं या फिर नाम को बदलने की प्रक्रिया को निर्धारित करता है.
नाम बदलने की वजह भी बतानी होती है
किसी भी राज्य जिले का नाम बदलने के लिए उसके पीछे का कारण भी बताना होता है. गौरतलब है कि नाम को बदलने की प्रक्रिया में अंतिम बार बड़ा बदलाव 1953 में किया गया था. उस वक्त गृह मंत्रालय के तत्कालीन उप सचिव सरदार फतेह सिंह ने राज्य सरकारों को पत्र भेजा था. नियमों के मुताबिक केवल राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव राज्य विधान सभा में उठाया जा सकता है.
सदन में बिल को कराना होता है पास
जानकारी के मुताबिक अगर केंद्र सरकार किसी राज्य के प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है. वहीं, केंद्र सरकार को किसी भी राज्य का नाम बदलने के लिए दोनों सदनों में बिल पास कराना होता है. वहीं, संसद में बिल पास होने के बाद ही अंतिम मुहर लगने के लिए इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है. वहीं, राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद राज्य का नाम बदलने का नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है. इन प्रक्रियाओं को पूरा करने में महीनों का समय लगता है.
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