जब भी कहीं बारिश होती है तो हमारे दिमाग में सिर्फ ओले, बारिश की बूंदे और या फिर बर्फ गिरने की ही तस्वीर बनती है. कई बार जब मौसम बहुत खराब हो जाता है तो आंधी, तूफान या फिर बिजली गिरती है लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि बारिश में आसमान से पानी नहीं बल्कि हीरे बरसते हों?
पहली नजर में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म या काल्पनिक कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन यह दावा वैज्ञानिकों की रिसर्च पर आधारित है. हमारे अंतरिक्ष में दो ऐसे विशाल ग्रह हैं, जहां का वातावरण इतना अलग और रहस्यमयी है कि वहां बनने वाली परिस्थितियां हीरों की बारिश का कारण बनती हैं. तो चलिए जानते हैं एक ऐसे ग्रह के बारे में जहां हीरों की बारिश होती है.
क्या कहते हैं वैज्ञानिक
दरअसल, वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारे सौरमंडल (Solar System) के सबसे दूर मौजूद नेपच्यून और यूरेनस ग्रहों पर ऐसी स्थिति बनती है जिसके कारण वहां हीरों की बारिश होती है. ये दोनों ग्रह पृथ्वी से कुई गुना बड़े हैं. नेपच्यून का आकार पृथ्वी से करीब 15 गुना और यूरेनस का करीब 17 गुना बड़ा माना जाता है.
कैसे बनते हैं इन ग्रहों पर हीरे?
जानकारी के अनुसार, इन दोनों ग्रहों के वातावरण में बड़ी मात्रा में मीथेन गैस मौजूद है. मीथेन हाइड्रोजन और कार्बन से मिलकर बनी होती है. ग्रहों के अंदर मौजूद बेहद ज्यादा दबाव और तापमान के कारण मीथेन टूट जाती है. इससे हाइड्रोजन और कार्बन अलग हो जाते हैं. इसके बाद कार्बन के छोटे-छोटे कण ज्यादा दबाव में हीरे का रूप ले लेते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि यही हीरे ग्रह के भीतर नीचे की ओर गिरते हैं, जिसे आम भाषा में ‘हीरों की बारिश’ कहा जाता है.
वैज्ञानिकों ने कैसे लगाया इसका पता?
इस रहस्य को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने एक खास तरह का प्रयोग किया. उन्होंने नेपच्यून और यूरेनस ग्रहों पर लेजर तकनीक की मदद से बेहद अधिक दबाव और तापमान वाले हालात बनाए. इसके बाद उन्होंने प्लास्टिक के एक खास पदार्थ पर लेजर डाली, जिसमें कार्बन और हाइड्रोजन मौजूद होते हैं. जब इस पदार्थ को बहुत ज्यादा दबाव और तापमान मिला, तो उसमें बेहद छोटे-छोटे हीरे (नैनो डायमंड) बनने लगे. इस सफल प्रयोग के बाद वैज्ञानिकों का भरोसा और मजबूत हुआ कि नेपच्यून और यूरेनस जैसे ग्रहों के अंदर भी इसी तरह की प्रक्रिया होती है, जिसकी वजह से वहां हीरे बनते हैं और उनकी बारिश होने की संभावना रहती है.
हर इंसान बन सकता है अरबपति?
वैज्ञानिकों का कहना है कि इन ग्रहों पर हीरे की मात्रा इतनी ज्यादा हो सकती है कि अगर किसी तरह उन्हें पृथ्वी पर लाया जा सके, तो उनकी कीमत इतनी ज्यादा होगी कि दुनिया का हर व्यक्ति अमीर बन सकता है. हालांकि, यह सिर्फ एक अनुमान है क्योंकि वहां तक पहुंचना और हीरों को वहां से पृथ्वी पर लाना तो बिल्कुल संभव नहीं है. यहां का तापमान शून्य से करीब -200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इतनी ठंड में कोई भी इंसान कुछ ही पल में जम सकता है.
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