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मणिकर्णिका घाट पर मंदिर टूटे, आवाज उठाने पर संजय सिंह पर FIR — सवालों पर सत्ता खामोश

काशी के मणिकर्णिका घाट पर कथित तोड़फोड़ के विरोध में बोलने पर संजय सिंह पर एफआईआर. AAP ने इसे हिंदू आस्था और लोकतांत्रिक आवाज पर हमला बताया.

Author Edited By : Bhawna Dubey
Updated: Jan 19, 2026 10:47
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काशी, जहां हर कण में आस्था बसती है, वहीं आज सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या धर्म की रक्षा की आवाज अब सत्ता को असहज करने लगी है. संजय सिंह का आरोप है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में मां गंगा के तट पर स्थित मंदिरों, शिवालय और धर्मनिष्ठ शासिका अहिल्याबाई होलकर जी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया गया. उन्होंने इसे सीधे-सीधे हिंदू धर्म की आस्था पर हमला बताया है. संजय सिंह का कहना है कि उन्होंने जब इस मुद्दे को उठाया, तो दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी गई.

मणिकर्णिका घाट केवल एक स्थान नहीं, बल्कि हिंदू आस्था का आधार है. इसी घाट का निर्माण 18वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होलकर जी ने कराया था. मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. ऐसे पवित्र स्थल पर तोड़फोड़ के आरोपों ने साधु-संतों, स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के मन में गहरा आक्रोश पैदा किया. काशी के साधुओं ने इसका विरोध किया, अहिल्याबाई होलकर जी के परिवार ने आवाज़ उठाई और यहां तक कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी आपत्ति दर्ज कराई. इसके बावजूद कार्रवाई उस नेता पर हुई, जिसने इस मुद्दे को सामने रखा.

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संजय सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि वे इन मुकदमों से डरने वाले नहीं हैं. उनका कहना है कि अगर मंदिर टूटते हैं और प्रतिमाएं तोड़ी जाती हैं, तो चुप रहना पाप है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि मंदिरों को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, न कि सवाल उठाने वालों को डराया जाए.

इस पूरे मामले पर आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट रुख अपनाया है. पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि मणिकर्णिका घाट पर मंदिरों को तोड़ने के भाजपा के कृत्य का विरोध करना अगर अपराध है, तो यह दिखाता है कि भाजपा अब हिंदुओं की भावनाओं को कुचलने पर उतर आई है. उनका कहना है कि आम आदमी पार्टी न कभी डरी है और न आगे डरेगी.

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आज काशी की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक एक ही सवाल गूंज रहा है, मंदिरों को नुकसान पहुंचे तो सत्ता मौन क्यों, और आस्था की बात करने पर एफआईआर क्यों? आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर खुद को हिंदू आस्था के साथ खड़ा बताती है और संजय सिंह को उस नेता के रूप में पेश करती है, जो सत्ता के दबाव के बावजूद धर्म और जनभावना की आवाज़ बनकर सामने आए हैं. यह लड़ाई किसी एक एफआईआर की नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और जनता के विश्वास की है, जिसे दबाया नहीं जा सकता.

First published on: Jan 19, 2026 10:47 AM

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