माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम तट पर माहौल गर्म हो गया, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पवित्र स्नान नहीं करने का निर्णय लिया. वे पालकी में अपने शिष्यों के साथ संगम नोज की ओर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने पालकी वापस मोड़ने को कहा और बिना स्नान किए सीधे अपने शिविर लौट गए. इस घटना को लेकर अब प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने स्थिति स्पष्ट की है.

पुलिस कमिश्नर ने बताई वजह

पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सुबह करीब 9 बजे रथ और पालकी के साथ बैरियर नंबर-2 को पार करते हुए संगम नोज की ओर पहुंचे थे. उनके साथ करीब 200 लोग मौजूद थे. उस समय संगम नोज पर लाखों श्रद्धालु मौजूद थे, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल थीं. हालात ऐसे थे कि संगम नोज पर तिल रखने की भी जगह नहीं थी.

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पुलिस कमिश्नर के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने साथ आए लोगों के साथ पालकी को संगम नोज तक ले जाने की जिद कर रहे थे. प्रशासन की ओर से उनसे पैदल मार्ग से आगे बढ़ने का अनुरोध किया गया था. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौनी अमावस्या के दिन वीवीआईपी स्नान पर पूरी तरह से रोक थी.

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आपको बता दें कि मौनी अमावस्या के कारण माघ मेले में संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी. सुबह से ही लाखों लोग संगम नोज और आसपास के घाटों पर स्नान के लिए पहुंचे थे. भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने संगम नोज पर कड़े सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम किए थे. इसी कारण उस दिन वीवीआईपी स्नान पर रोक लगाई गई थी और सभी संतों व श्रद्धालुओं से तय नियमों का पालन करने की अपील की गई थी.