प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हरदोई से 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया. यह यूपी के सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में से एक है, जिसे 3.5 साल से भी कम समय में पूरा किया गया है. यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जोड़ता है, जिससे राज्य के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है.

दशकों से पूर्वी उत्तर प्रदेश अपनी जनसंख्या और आर्थिक क्षमता के बावजूद अपेक्षाकृत कम विकसित रहा है. गंगा एक्सप्रेसवे इस क्षेत्र की छिपी हुई आर्थिक क्षमता को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा. यह प्रोजेक्ट बेहतर पहुंच, दूरी में कमी और राज्य के विकास कॉरिडोर से मजबूत जुड़ाव के माध्यम से पूर्वी यूपी को नई आर्थिक दिशा देगी.

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गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यात्रा समय करीब 11 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे रह जाएगा. इससे बिजनेस, लॉजिस्टिक्स, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन क्षेत्रों को व्यापक लाभ होगा. सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए इस एक्सप्रेसवे पर एआई-सक्षम कैमरा सिस्टम लगाए गए हैं, जो दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एडवांस अलर्ट करेंगे.

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इस प्रोजेक्ट के तहत शाहजहांपुर जिले में 3.5 किमी लंबा इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी तैयार किया गया है, जिससे भारतीय वायुसेना के एयरक्राफ्ट को आपात स्थिति में लैंड कर सकेंगे और इस रणनीतिक कॉरिडोर की क्षमताएं और मजबूत होंगी.

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12 जिलों से गुजरने वाला यह छह लेन का एक्सप्रेसवे, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है, बाजारों, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा केंद्रों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच को बेहतर बनाएगा. आम नागरिकों को जहां आवश्यक सेवाओं तक तेजी से पहुंच मिलेगी, वहीं व्यापार और उद्योगों को तेज कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा.

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अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड, जो अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) का रोड्स बिजनेस है, ने इस परियोजना में 464 किमी, यानी कुल एलाइनमेंट का लगभग 80% हिस्सा विकसित किया. निर्माण के समय में इश प्रोजेक्ट पर 12,000 से ज्यादा श्रमिक तैनात रहे. बाकि हिस्से का निर्माण आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर ने बनाया है.
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे हर वर्ष ₹25,000–30,000 करोड़ की लॉजिस्टिक्स बचत करेगा, अगले एक दशक में लगभग 3 लाख रोजगार सृजित करेगा और राज्य के जीडीपी में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का योगदान देगा. इसके साथ ही, यह फ्रेट वेलोसिटी को बढ़ाने और कई क्षेत्रों में इन्वेंट्री होल्डिंग लागत को कम करने में मदद करेगा.

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यह ट्रंक कॉरिडोर कृषि उत्पादों और अन्य वस्तुओं की तेज आवाजाही सुनिश्चित कर व्यापार प्रवाह को मजबूत करेगा. किसानों और छोटे कारोबारियों को बेहतर बाजार पहुंच और बेहतर मूल्य प्राप्ति में सहायता मिलेगी.
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और कृषि कनेक्टिविटी को मजबूती देने के साथ करीब 8 करोड़ से अधिक लोगों को को फायदा पहुंचाएगा. प्रयागराज और वाराणसी जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंच को भी बेहतर करेगा, जिससे आध्यात्मिक पर्यटन मजबूत होगा.