भारत की सबसे बड़ी निजी पोर्ट कंपनी Adani Ports and Special Economic Zone Ltd ने देश में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने भारत का पहला “पोर्ट ऑफ रिफ्यूज” (PoR) शुरू किया है, जो समुद्र में आपात स्थिति में फंसे जहाजों के लिए सुरक्षित जगह का काम करेगा.
“पोर्ट ऑफ रिफ्यूज” का मतलब है ऐसी तय जगह, जहां किसी संकट में फंसे जहाज को सुरक्षित लाया जा सके, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके और पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह व्यवस्था पहले से कई देशों में मौजूद है, लेकिन भारत में अब तक इसे औपचारिक रूप से लागू नहीं किया गया था.
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भारत की लंबी समुद्री तटरेखा (करीब 11,000 किलोमीटर) और अहम अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स को देखते हुए यह पहल काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. APSEZ ने इसके लिए दो जगहों को चुना है पश्चिमी तट पर Dighi Port और पूर्वी तट पर Gopalpur Port.
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इन दोनों स्थानों पर ऐसे जहाजों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिनमें मरम्मत, आग बुझाने की व्यवस्था, प्रदूषण नियंत्रण और आपातकालीन सेवाएं शामिल हैं. इसके लिए आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित टीमें तैनात की जाएंगी.
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इस पहल के लिए APSEZ ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ समझौता भी किया है, जिसमें SMIT Salvage और Maritime Emergency Response Centre शामिल हैं. इससे भारत को वैश्विक स्तर की तकनीक और अनुभव का लाभ मिलेगा और समुद्री हादसों में तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगी.
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APSEZ के CEO Ashwani Gupta ने कहा कि यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा. उन्होंने बताया कि पोर्ट सिर्फ व्यापार के लिए ही नहीं होते, बल्कि आपात स्थिति में लोगों की जान बचाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं.
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वहीं, भारत सरकार के शिपिंग महानिदेशक Shyam Jagannathan ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे समुद्री हादसों के दौरान बेहतर और समय पर कार्रवाई हो सकेगी.
कुल मिलाकर, यह पहल भारत की समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक व्यापार में उसकी स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.