हंगेरियन लोककथाओं पर बच्चों का बेहतरीन अभिनय
राजधानी के चाणक्य पूरी में स्थित हंगेरियन दूतावास में एक अनोखा सांस्कृतिक आयोजन देखने को मिला, जहां बस्ती के बच्चों ने हंगेरियन लोककथाओं को मंच पर जीवंत कर दिया. भारत और हंगरी के इस सुन्दर संगम को नाम दिया गया ' मंच' का जिसने इन बच्चों को एक ऐसा प्लेटफार्म दिया जिसमें दिग्गज थियेटर कर्मी विक्रांत सिंह द्वारा ६ हफ़्तों की कार्यशाला कराई गयी. साथ ही इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मिमा ( मेरा इंडिया मेरा अधिकार) नाम के NGO ने विशेष भूमिका निभाई. एक महीने की कड़ी मेहनत और थिएटर प्रयास के बाद बच्चों ने आत्मविश्वास के साथ ऐसी प्रस्तुति दी, जिसने मौजूद दर्शकों को भावुक कर दिया. इन बच्चों ने न केवल विदेशी संस्कृति को समझा, बल्कि उसे हिंदी में बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत भी किया.
भारत–हंगरी संस्कृति और साहित्य का बेजोड़ संगम
यह आयोजन केवल एक नाटक नहीं, बल्कि भारत और हंगरी की संस्कृति तथा साहित्य का खूबसूरत संगम था. हंगेरियन कहानियों को भारतीय परिवेश और हिंदी भाषा में प्रस्तुत कर बच्चों ने यह साबित कर दिया कि कला और संस्कृति की कोई सीमा नहीं होती. इस पहल का उद्देश्य सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से बच्चों को वैश्विक सोच और नए अवसरों से जोड़ना था. इसके लिए हंगेरियन सांस्कृतिक केंद्र की निदेशिका मरियन एरदो को श्रेय जाता है जिनकी परिकल्पना से इस सांस्कृतिक-सामाजिक कार्यक्रम को अंजाम दिया गया.
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हंगरी में भारत की पूर्व राजदूत लक्ष्मी पूरी और प्रसिद्द इन्फ्लुएंसर जय मदन ने भी शिरकत की
कार्यक्रम में मुख्या अतिथि के तौर पर श्रीमती लक्ष्मी पूरी शामिल हुयी जिन्होनें हंगरी में भारत के एम्बेसडर के तौर पर कई वर्ष पदासीन रही. बच्चों द्वारा नाट्य प्रस्तुति से भावुक हो उन्होंने कहा ' इस अद्भुत भारतीय और हंगेरियाई संस्कृति के संगम को देखकर में अभिभूत हो गयी. बस्ती के इन बच्चों को एम्बेसी द्वारा मौका मिला , जिससे उनकी प्रतिभा सामने आयी '. इंस्टाग्राम की जानी मानी स्पिरिचुअल इन्फ्लुएंसर जय मैदान ने न सिर्फ सांस्कृतिक केंद्र के इस पहल की सराहना की, बल्कि बच्चों के साथ बात चीत करके उनके साथ वीडियोस भी सोशल मीडिया पर साझा किया.
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News24 के मीडिया कॉलेज ISOMES के छात्रों ने भी लिया सक्रिय हिस्सा
इस खास कार्यक्रम में News24 के मीडिया कॉलेज ISOMES के छात्रों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई. छात्रों ने आयोजन की कवरेज, संवाद और प्रबंधन में भाग लेकर इसे सफल बनाने में योगदान दिया.साथ ही आईसम्स की डायरेक्टर तनूजा शंकर द्वारा इस कार्यशाला और मीमा संस्था के इन मेधावी बच्चों पर एक डाक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई जो आगामी हैबिटैट फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाई जाएगी.
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में जल्द ही आयोजित होने वाले जश्न -ए-बचपन में भी इन नाटकों का मंचन शामिल किया गया है. इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि सही मार्गदर्शन और मंच मिले, तो बस्ती के बच्चे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं. यह पहल न केवल सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बनी, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नई उम्मीद भी जगाकर गई.