Delhi Master Plan 2047: देश की राजधानी दिल्ली में रहने वालों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार ने दिल्ली के भविष्य को संवारने और शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' पेश किया है. केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को इस महत्वाकांक्षी योजना का खाका सामने रखा. दिल्ली में अब खास '24-Hour City' जोन्स विकसित किए जाएंगे. बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित जमीन का होगा बेहतर इस्तेमाल, पुराने फ्लैट्स को भी दोबारा बनाया जाएगा. इस प्लान का सबसे बड़ा मकसद दिल्ली के लोगों को सस्ते घर और विश्वस्तरीय ट्रांसपोर्ट की सुविधा मुहैया कराना है.
24 घंटे चलेंगी गतिविधियां, रात में भी दौड़ेगी मेट्रो
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, राजधानी में ऐसे स्पेशल जोन बनाए जाएंगे जहां कामकाज और व्यावसायिक गतिविधियां 24 घंटे लगातार जारी रहेंगी. इन इलाकों में रात के समय भी लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 24 घंटे पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी, जिसमें खासतौर पर 24 घंटे मेट्रो कनेक्टिविटी देना शामिल है.
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लो-डेंसिटी वाले रिहायशी इलाकों के लिए सड़कों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है. इन क्षेत्रों में अंदरूनी सड़कें 18 मीटर चौड़ी होंगी, जबकि मास्टर ट्रंक सड़कों के लिए 45 मीटर का 'राइट ऑफ वे' तय किया गया है. जाम और भीड़भाड़ से बचने के लिए 15 से 18 मीटर चौड़ी सड़कों के दोनों तरफ प्लॉट्स के साथ खुली जगह छोड़ना अनिवार्य होगा.
FAR और फार्महाउस को लेकर बड़ा फैसला
प्लॉट मालिकों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने टीडीआर (TDR) और एफएआर (FAR) के नियमों को आसान किया है. इन जोन्स में स्टैंडर्ड 2.5 एकड़ के बेंचमार्क पर FAR दिया जाएगा. इसका मतलब यह है कि अगर किसी का प्लॉट 2.5 एकड़ से छोटा भी है, तो भी उसे 2.5 एकड़ के पूरे अनुपात का FAR लाभ मिलेगा. हालांकि, नियमों को सख्त रखते हुए यह स्पष्ट कर दिया गया है कि लो-डेंसिटी डेवलपमेंट जोन में 2.5 एकड़ से छोटे प्लॉट पर फार्महाउस बनाने की अनुमति बिल्कुल नहीं होगी.
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दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में क्या-क्या खास?
लाखों नए घर और पुराने फ्लैट्स का कायाकल्प
- मास्टर प्लान 2047 के तहत दिल्ली में करीब 40 लाख नए फ्लैट्स बनाने की तैयारी है. इसके साथ ही पुराने पड़ चुके फ्लैटों को फिर से डेवलप किया जाएगा. सरकार का पूरा ध्यान आम नागरिकों को किफायती और बेहतर आवास देने पर केंद्रित है, ताकि हर तबके को छत मिल सके.
695 KM लंबा मेट्रो नेटवर्क और 6 RRTS रूट
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- राजधानी के ट्रैफिक को रफ्तार देने और एनसीआर से कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बड़े पैमाने पर अपग्रेड किया जाएगा. इस योजना के तहत मेट्रो नेटवर्क को बढ़ाकर 695 किलोमीटर तक ले जाया जाएगा. इसके अलावा यात्रियों के तेज और आसान सफर के लिए 6 नए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) रूट भी तैयार किए जाएंगे.
520 वर्ग KM जमीन का सबसे बेहतर इस्तेमाल
- दिल्ली में खेती की जमीन सिर्फ 520 वर्ग किलोमीटर तक ही बची है. तेजी से बढ़ती आबादी को देखते हुए जमीन की कमी एक बड़ी चुनौती है. इसलिए मास्टर प्लान में बिना सोचे-समझे जमीन फैलाने के बजाय, मौजूद जमीन का सबसे बेहतरीन इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है. कम से कम जमीन में ज्यादा लोगों के लिए बेहतर घर और बुनियादी सुविधाएं तैयार की जाएंगी.
2047 तक 3.2 करोड़ आबादी का अनुमान
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- फिलहाल दिल्ली की आबादी करीब 2.40 करोड़ आंकी गई है, जो 2047 तक बढ़कर लगभग 3.2 करोड़ पहुंचने का अनुमान है. इस बढ़ती आबादी के लिए घर, चौड़ी सड़कें, मेट्रो, स्कूल और नागरिक सुविधाओं की जरूरत होगी. नया मास्टर प्लान इसी भविष्य के दबाव को संभालने के लिए तैयार किया गया है.
40 लाख नए फ्लैट्स और पुराने मकानों का कायाकल्प
- दिल्ली में घरों की बढ़ती मांग को देखते हुए करीब 40 लाख नए फ्लैट बनाए जाएंगे. इनमें सबसे ज्यादा जोर सस्ते और किफायती मकानों पर होगा ताकि आम लोगों को अपनी छत मिल सके. इसके साथ ही, 50 साल से ज्यादा पुराने टूटे-फूटे फ्लैटों का बड़े स्तर पर रीडेवलपमेंट और रेनोवेशन किया जाएगा, जिससे पुराने इलाकों की सूरत बदलेगी.
695 KM लंबा मेट्रो नेटवर्क और 6 नए RRTS रूट
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- पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने के लिए मेट्रो के मौजूदा 416 किलोमीटर के नेटवर्क को बढ़ाकर 695 किलोमीटर किया जाएगा, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक जाम घटेगा. इसके अलावा, रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के तहत एक लाइन के बाद अब 6 नए रूट्स के एग्रीमेंट पर काम चल रहा है. इससे दिल्ली और एनसीआर के शहरों के बीच सफर बेहद तेज और आसान हो जाएगा.
3 बड़े ट्रांजिट हब और सिंगल विंडो सिस्टम
- सफर को झंझट-मुक्त बनाने के लिए सराय काले खां, आनंद विहार और कश्मीरी गेट को बड़े ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां ट्रांसपोर्ट के सभी साधन आपस में जुड़ेंगे. वहीं कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू होगा, जिससे एक ही जगह से तेज अप्रूवल मिल सकेगा.
यमुना खादर का बचाव और कंट्रोल्ड डेवलपमेंट
- दिल्ली में यमुना के आसपास का करीब 180 किलोमीटर का खादर इलाका पर्यावरण, बाढ़ नियंत्रण और पानी के लिहाज से बेहद संवेदनशील है. इसे ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान में बिना नदी के इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचाए केवल कंट्रोल्ड डेवलपमेंट की इजाजत दी जाएगी.
30 मीटर चौड़ी सड़कों पर कमर्शियल गतिविधियों की छूट
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मास्टर प्लान को लेकर सरकार का विजन साझा करते हुए कई अहम फैसलों की जानकारी दी है. मास्टर प्लान में व्यापारियों और संपत्ति मालिकों को बड़ी राहत देते हुए एक बड़ा फैसला लिया गया है. मुख्यमंत्री के अनुसार, दिल्ली में सभी 30 मीटर चौड़ी सड़कों पर स्थित इमारतों के ग्राउंड फ्लोर (भू-तल) पर अब व्यावसायिक यानी कमर्शियल गतिविधियों के संचालन की अनुमति होगी. इस कदम से राजधानी में व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा, मास्टर प्लान 2047 का सबसे प्रमुख फोकस समाज के सभी वर्गों के लिए आवास का उचित प्रबंध करना है, ताकि बढ़ती आबादी को व्यवस्थित रूप से आशियाना मिल सके.
1484 वर्ग KM जमीन की सीमाओं के बीच संपूर्ण विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली 1,484 वर्ग किलोमीटर के दायरे में सिमटी हुई है और इसके पास जमीन से जुड़ी अपनी सीमाएं हैं. हालांकि, इन सीमाओं को ध्यान में रखते हुए पूरे शहर के समग्र विकास को प्राथमिकता दी गई है. योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों, अनधिकृत कॉलोनियों और सुनियोजित इलाकों, सभी के संतुलित विकास पर खास ध्यान दिया गया है. शहरी विकास के इस खाके में राजधानी के बढ़ते वाहन प्रदूषण को नियंत्रित करने का पूरा ध्यान रखा गया है. इस नए मास्टर प्लान के माध्यम से सरकार दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और जनहितैषी बनाने की दिशा में काम कर रही है.