Competition Commission of India ने Adani Enterprises Ltd और Adani Green Energy Limited के खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. यह मामला Solar Energy Corporation of India के एक टेंडर से जुड़ा था. जांच में आयोग को कहीं भी प्रतिस्पर्धा विरोधी व्यवहार या बाजार में दबदबे के गलत इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला.

आयोग ने 16 अप्रैल को दिए गए अपने फैसले में कहा कि सभी तथ्यों और परिस्थितियों की जांच के बाद यह साफ हो गया कि कानून की धारा 3 और 4 का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है. इसलिए इस मामले की जांच को यहीं समाप्त कर दिया गया.

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बाजार में दबदबे के मुद्दे पर आयोग ने कहा कि भारत का बिजली उत्पादन क्षेत्र काफी बड़ा और विविध है. इसमें कोयला, सौर, पवन और जल ऊर्जा जैसे कई क्षेत्रों में अलग-अलग कंपनियां काम कर रही हैं. ऐसे में Adani समूह को इस बाजार में प्रमुख या दबदबा रखने वाला खिलाड़ी नहीं माना जा सकता. इस क्षेत्र में NTPC, Tata Power और JSW Energy जैसी बड़ी कंपनियां भी सक्रिय हैं.

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आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि टेंडर की शर्तें तय करना उस संस्था का अधिकार होता है जो टेंडर जारी करती है. इस मामले में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला कि टेंडर दस्तावेज केवल बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाए गए थे.

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‘ग्रीन शू विकल्प’ को लेकर उठाई गई आपत्तियों को भी आयोग ने खारिज कर दिया. आयोग के अनुसार, यह प्रावधान प्रतिस्पर्धा को सीमित नहीं करता और नीति के अनुरूप है. रिश्वतखोरी और गलत व्यवहार के आरोपों पर आयोग ने कहा कि यदि इन्हें सही भी मान लिया जाए, तब भी यह प्रतिस्पर्धा कानून की धारा 4 के तहत दुरुपयोग नहीं माना जाएगा. इन सभी तथ्यों के आधार पर आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में प्रतिस्पर्धा से जुड़ी कोई समस्या नहीं है, इसलिए केस को बंद कर दिया गया और दोनों कंपनियों को राहत दी गई.

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