अडाणी यूनिवर्सिटी ने तकनीकी शिक्षा और शोध में अपनी प्रमुख भूमिका को फिर से रेखांकित किया

अडानी यूनिवर्सिटी में ‘ट्रेंड्स एंड इनोवेशन इन एयरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स’ विषय पर IETE वेस्ट ज़ोन सेमिनार और ISF कांग्रेस 2026 का आयोजन हुआ, जिसमें इसरो, उद्योग और शिक्षाविदों ने भाग लिया.
कार्यक्रम में उभरती तकनीकों, अनुसंधान सहयोग और आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया, जिससे विश्वविद्यालय की तकनीक-केंद्रित पहचान और मजबूत हुई.

अडाणी यूनिवर्सिटी ने तकनीकी शिक्षा और शोध में अपनी प्रमुख भूमिका को फिर से रेखांकित किया
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अडाणी यूनिवर्सिटी ‘ट्रेंड्स एंड इनोवेशन इन एयरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स’ विषय पर आयोजित आईईटीई वेस्ट ज़ोन सेमिनार और आईईटीई स्टूडेंट्स फोरम (आईएसएफ) कांग्रेस 2026 का एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र बनकर उभरी.

यह सेमिनार दिल्ली मुख्यालय वाली इंस्टीट्यूशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स (IETE) द्वारा आयोजित किया गया, जिसकी मेजबानी उसके अहमदाबाद सेंटर ने अडाणी यूनिवर्सिटी, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (SAC–ISRO) और भास्कराचार्य इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशंस एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स (BISAG-N) के सहयोग से की. सत्र अहमदाबाद और गांधीनगर दोनों स्थानों पर आयोजित हुए.

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उद्घाटन समारोह आज अहमदाबाद के शांतिग्राम स्थित अडानी यूनिवर्सिटी परिसर में पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ.

अडाणी यूनिवर्सिटी के प्रोवोस्ट प्रो. (डॉ.) धवल पुजारा ने स्वागत भाषण दिया और नवाचार-आधारित शिक्षा, शोध उत्कृष्टता तथा उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग पर विश्वविद्यालय के फोकस को रेखांकित किया. उद्घाटन भाषण आईईटीई अहमदाबाद सेंटर की चेयरपर्सन श्रीमती प्रीति अग्रवाल ने दिया.

कार्यक्रम में इसरो के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के निदेशक श्री निलेश देसाई मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष पांडे विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए. मुख्य वक्तव्य अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ श्री आशीष राजवंशी ने दिया. उन्होंने राष्ट्र निर्माण में इलेक्ट्रॉनिक्स और एवियोनिक्स की बढ़ती भूमिका, आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना और विकसित भारत 2047 की रूपरेखा पर अपने विचार रखे. आईईटीई के अध्यक्ष श्री सुनील ने अध्यक्षीय संबोधन दिया.

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सेमिनार में एयरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स में उभरती तकनीकों, अनुसंधान प्रगति और नवाचार रुझानों पर कई तकनीकी सत्र और विशेषज्ञों द्वारा चर्चाएं आयोजित की गईं. उद्योग जगत के पेशेवरों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की, जिससे यह कार्यक्रम ज्ञान के आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच बना.

उद्घाटन सत्र की मेजबानी कर अडानी यूनिवर्सिटी ने तकनीक-केंद्रित शिक्षा और अनुसंधान के एक अग्रणी केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत किया, साथ ही एयरोस्पेस और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमताओं को सुदृढ़ करने के राष्ट्रीय प्रयासों में योगदान दिया. कार्यक्रम का समापन भविष्य में निरंतर सहयोग, शोध साझेदारियों और नवाचार-आधारित विकास पर जोर देने के साथ हुआ.

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