भारत का पवन ऊर्जा (विंड पावर) क्षेत्र अब नए और बड़े स्तर पर आगे बढ़ रहा है. Adani New Industries Limited (ANIL) गुजरात के मुंद्रा प्लांट में 91.2 मीटर लंबी पवन टरबाइन ब्लेड बनाने की तैयारी कर रही है. यह भारत में बनने वाली अब तक की सबसे लंबी ऑनशोर ब्लेड होगी. इन ब्लेड का उपयोग नई तकनीक वाली टरबाइनों में किया जाएगा, जो कम और मध्यम हवा वाले क्षेत्रों में भी ज्यादा बिजली पैदा कर सकेंगी.
अभी मुंद्रा प्लांट में 78.6 मीटर और 80.5 मीटर लंबी ब्लेड बनती हैं. 91.2 मीटर की ब्लेड डिजाइन और तकनीक के लिहाज से बड़ा कदम है. जानकारी के अनुसार, इन नई ब्लेड का एक सेट नई टरबाइन पर लगाया जा चुका है और इस साल के अंदर बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू हो सकता है.
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ब्लेड लंबी होने से क्या फायदा?
जितनी लंबी ब्लेड होगी, टरबाइन उतनी ज्यादा हवा पकड़ पाएगी. 91.2 मीटर ब्लेड से टरबाइन का रोटर लगभग 185 मीटर का होगा, जो करीब 26,600 वर्ग मीटर क्षेत्र में हवा को कवर करेगा. इससे बिजली उत्पादन बढ़ेगा.
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भारत में कई ऐसे इलाके हैं जहां हवा की रफ्तार कम या मध्यम होती है. बड़ी ब्लेड और ज्यादा क्षमता वाली (5 मेगावाट से अधिक) टरबाइन इन इलाकों में भी बिजली उत्पादन को लाभदायक बनाती हैं.
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निवेश और उत्पादन क्षमता
मुंद्रा में ANIL की मौजूदा उत्पादन क्षमता 2.25 गीगावाट (GW) प्रति वर्ष है, जिसे आगे बढ़ाकर 5 GW और बाद में 10 GW करने की योजना है. अब तक इस क्षेत्र में लगभग 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है. कंपनी भविष्य में ऑटोमेशन और नई सामग्री (जैसे रीसायक्लेबल ब्लेड) पर भी निवेश करेगी.
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भारत की स्थिति
भारत दुनिया में पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में चौथे स्थान पर है और यहां करीब 55 GW पवन ऊर्जा स्थापित है. देश में लगभग 20 GW की पवन उपकरण निर्माण क्षमता है, जो वैश्विक मांग का लगभग 10% पूरा कर सकती है.
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2025 में भारत ने 6.3 GW नई पवन ऊर्जा जोड़ी, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक इजाफा है.
सरकारी सहयोग
सरकार ने पवन टरबाइन में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ मैग्नेट के घरेलू उत्पादन के लिए 7,280 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की है.
साथ ही 2026 के बजट में कई जरूरी उपकरणों पर 5% की रियायती कस्टम ड्यूटी 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई है, जिससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
ऑर्डर और निर्यात
ANIL को 304 मेगावाट के ऑर्डर मिले हैं. कंपनी गुजरात के खावड़ा में 5.2 मेगावाट की बड़ी टरबाइन भी लगा चुकी है.
अब कंपनी यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में भी ब्लेड और टरबाइन निर्यात करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए जर्मनी के रोस्टॉक में रिसर्च सेंटर और भारत में 45 सदस्यीय आरएंडडी टीम काम कर रही है.
आगे की योजना
इस वित्त वर्ष में ANIL लगभग 1.25 GW टरबाइन बाहरी ग्राहकों को और इतनी ही क्षमता अपनी समूह कंपनी की परियोजनाओं के लिए देने की योजना बना रही है.
कुल मिलाकर, भारत में इतनी लंबी और उन्नत पवन टरबाइन ब्लेड का निर्माण देश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत बनाएगा और भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे ले जाएगा.