मुंबई के एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की जमीन कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और पार्टनरशिप डीड में हेरफेर कर हड़पने का मामला सामने आया है. शिकायतकर्ता रवि कमलेश्वर पुजारी की शिकायत पर काशिमिरा पुलिस ने राजेश कुमार झा, विकास सिंह, मनोज कुमार सिंह और सुरेखा नारखेडे के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप में मामला दर्ज किया है.
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(2), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 341(1), 339, 49 और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
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एफआईआर के अनुसार राजेश झा और विकास सिंह ने पुजारी से उनकी निष्क्रिय कंपनी किरण कंस्ट्रक्शन को खरीदने का करार किया था. इस करार में मुख्य शर्त यह थी कि कंपनी के नाम पर दर्ज वसई की करीब 16 एकड़ और गोरेगांव की लगभग 725 स्क्वायर मीटर जमीन पर अधिकार पुजारी परिवार का ही रहेगा.
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इस बीच गोरेगांव की जमीन के लिए खरीदार ढूंढने और संभावित ग्राहकों को कागजात दिखाने के बहाने आरोपियों ने संपत्ति के मूल दस्तावेज अपने पास ले लिए. शिकायत के अनुसार बाद में दस्तावेज लौटाने को लेकर आरोपियों ने लगातार टालमटोल की.
आरोप है कि राजेश झा और विकास सिंह ने पुजारी की जानकारी के बिना एग्रीमेंट से इस शर्त से जुड़े पन्ने हटाकर एक कथित फर्जी पार्टनरशिप डीड तैयार की, जिससे कंपनी की संपत्तियों पर नए पार्टनर्स का अधिकार दिखाया गया. इसके बाद एक नई डीड बनाकर मनोज कुमार सिंह और सुरेखा नारखेडे को पार्टनर बनाया गया और उसी के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में फेरफार कर सातबारा (7/12) अभिलेख में उनके नाम दर्ज करा लिए गए.
इस पूरी साजिश का खुलासा तब हुआ जब आरोपियों ने उक्त जमीन को एक अन्य व्यक्ति को बेचने की कोशिश की. दस्तावेजों की जांच के दौरान वह व्यक्ति पुजारी परिवार तक पहुंचा, जिसके बाद पूरे मामले की जानकारी सामने आई.
मामले में यह भी आरोप है कि संबंधित तलाठी विक्रम बाड़ ने दस्तावेजों की पर्याप्त जांच किए बिना ही जमीन का नामांतरण कर दिया. उनकी भूमिका भी अब जांच के घेरे में आ गई है और उनके खिलाफ अलग से शिकायत दर्ज कराई गई है.
मिली जानकारी के मुताबिक इन आरोपियों के ख़िलाफ़ अन्य पुलिस थानों में भी ज़मीन से जुड़े धोखाधड़ी और जालसाज़ी आरोप के तहत और भी अलग अलग कई मामले दर्ज हैं. सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र कांबले के मुताबिक काशिमिरा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की सत्यता, राजस्व रिकॉर्ड में हुए फेरफार और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
'फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इस मामले से संबंधित FIR की कॉपी नीचे दी गई है.'