भारत सरकार ने देश की सुरक्षा को देखते हुए CCTV कैमरों के इस्तेमाल और उनकी बिक्री को लेकर बेहद सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है. हाल ही में जांच एजेंसियों ने एक ऐसे बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है जो भारत में लगे कैमरों का डेटा चोरी छिपे पाकिस्तान भेज रहा था. यह मामला सामने आने के बाद सरकार ने इसे केवल निगरानी का नहीं बल्कि नेशनल सिक्योरिटी का मुद्दा माना है. अब मार्केट में बिकने वाले हर सीसीटीवी कैमरे के लिए खास स्टैंडर्ड तय कर दिए गए हैं और सरकारी विभागों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना मानक वाले कैमरों की खरीद बिल्कुल न करें.
चीनी डिवाइस और कमजोर सिक्योरिटी का बड़ा खतरा
भारत में लगे हजारों आईपी कैमरे सीधे इंटरनेट से जुड़े हैं और इनमें बेसिक सिक्योरिटी की भारी कमी पाई गई है जिससे इन्हें हैक करना बहुत आसान हो जाता है. खासकर चीन से आने वाले सस्ते डिवाइस और उनके सॉफ्टवेयर पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं क्योंकि इन्हें रिमोटली कंट्रोल करके डेटा बाहर भेजा जा सकता है. साइबर एजेंसियां पहले भी चेतावनी दे चुकी हैं कि डिफॉल्ट पासवर्ड और पुराने फर्मवेयर की वजह से ये कैमरे हैकर्स के लिए आसान टारगेट बन जाते हैं. सरकार ने अब साफ कर दिया है कि किसी भी कैमरे में कोई ‘बैकडोर’ यानी डेटा लीक करने का गुप्त रास्ता नहीं होना चाहिए.
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अब हर कैमरे का होगा सर्टिफिकेशन और कड़ी जांच
सरकार के नए नियमों के मुताबिक अब हर सीसीटीवी कंपनी को अपने डिवाइस के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की पूरी कुंडली देनी होगी. इसमें इस्तेमाल होने वाली चिप, फर्मवेयर और सोर्स कोड तक की जानकारी शामिल होगी ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को पकड़ा जा सके. अब कोई भी कैमरा बिना सरकारी मान्यता प्राप्त लैब में टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के भारत में नहीं बिक पाएगा. कई भारतीय कंपनियां चीन से कैमरे मंगाकर उन पर अपना स्टिकर लगाकर बेच रही थीं जिन पर अब सरकार पूरी तरह शिकंजा कसने की तैयारी में है ताकि लोगों की प्राइवेसी सुरक्षित रहे.
इंडस्ट्री ने किया समर्थन
सीसीटीवी इंडस्ट्री के दिग्गजों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे साइबर सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम बताया है. सीपी प्लस जैसी बड़ी कंपनियों का कहना है कि इन नियमों से आम लोगों का भरोसा बढ़ेगा और भारत ग्लोबल लेवल पर एक सुरक्षित सर्विलांस सिस्टम तैयार कर सकेगा. अब जब एआई और क्लाउड तकनीक का दौर बढ़ रहा है तब सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी हो गई है. आने वाले समय में केवल वही कंपनियां बाजार में टिक पाएंगी जो नेशनल सिक्योरिटी के इन कड़े मापदंडों को पूरा करेंगी और अपनी तकनीक को पूरी तरह स्वदेशी और सुरक्षित बनाएंगी.
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