Piyush Goyal On Carbon Emission: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विकसित पश्चिमी देशों की आलोचना की है. उन्होंने ग्लोबल कार्बन एमिशन में इन देशों की ऐतिहासिक भूमिका और 2015 के पेरिस समझौते के तहत किए गए ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ के वादों को पूरा करने में उनकी नाकामी पर सवाल उठाए हैं. ‘बर्लिन ग्लोबल डायलॉग’ के दौरान एक चर्चा में बोलते हुए गोयल ने एक विदेशी महिला से कहा कि अमीर देशों को पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए बड़ी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और विकासशील देशों को वित्तीय तथा तकनीकी मदद देनी चाहिए.
भारत में कम ‘प्रति व्यक्ति उत्सर्जन’
पीयूष गोयल ने भारत की अबादी और ग्लोबल ग्रीनहाउस गैस एमिशन में इसके योगदान के बीच के फर्क पर सवाल उठाया. उन्होंने बताया कि दुनिया की तकरीबन 17% आबादी भारत में रहती है, लेकिन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान 3% से भी कम है. इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों की वैश्विक आबादी में हिस्सेदारी बहुत कम है, लेकिन उत्सर्जन के लिए उन पर ऐतिहासिक जिम्मेदारी बहुत ज्यादा है.
गोयल ने प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के अंतर पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि यूरोप का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव भारत की तुलना में 7 से 8 गुना ज्यादा है. उन्होंने तर्क दिया कि जलवायु संकट के लिए विकासशील देशों पर बेवजह बोझ नहीं डाला जाना चाहिए, क्योंकि ये संकट खास तौर से अमीर अर्थव्यवस्थाओं में दशकों तक चली औद्योगिक गतिविधियों के कारण पैदा हुआ है.
100 अरब डॉलर के ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ वादे पर सवाल
पीयूष गोयल ने 2015 के पेरिस जलवायु सम्मेलन में विकसित देशों की तरफ से किए गए ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ के वादे पर भी चिंता जताई. इस समझौते के तहत अमीर देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकासशील देशों की मदद के लिए हर साल 100 अरब डॉलर जुटाने का वादा किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि ये वादा की गई मदद कई देशों तक उस तरह नहीं पहुंची, जैसी उम्मीद थी. उन्होंने इस वादे को ‘पूरे न किए गए वादों की एक सीरीज’ करार दिया.
गोयल ने कहा कि प्रशांत और कैरेबियन क्षेत्रों के छोटे आइलैंड देशों सहित कई कमजोर राष्ट्रों को जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए वित्तीय और तकनीकी मदद की जरूरत है. उन्होंने यूरोपीयन यूनियन के ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (CBAM) पर भी सवाल उठाए, जो कुछ इम्पोर्ट की गई चीजों पर कार्बन से जुड़ी लागत लगाता है.
भारत में उत्सर्जन का रुझान
ये कमेंट ऐसे वक्त में आया है जब ऐसी रिपोर्टें हैं कि पिछले साल की तुलना में 2025 में भारत के ग्रीनहाउस गैस एमिशन में कमी आई है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने इस बदलाव का कुछ क्रेडिट मौसम के हालात और रिन्यूएबल एनर्जीके विस्तार को दिया है. हालांकि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैस एमिशन करने वाले देशों में से एक बना हुआ है, लेकिन यहां प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत से कम है.
संबंधित खबरें
रैपिडो ड्राइवर बन मुंबई में घूम रहा था जैश से जुड़ा संदिग्ध, हुआ गिरफ्तार
16 mins agoकश्मीर में गुलदाउदी के फूलों से सजा बाग-ए-गुल-ए-दाऊद बगीचा
29 mins ago'आतंकवाद के खिलाफ जारी रहेगी लड़ाई', जॉर्डन चर्च अटैक की भारत ने की निंदा
1 hr agoसऊदी अरब में फंसे कश्मीरी उमरा यात्री, फ्लाइट रद्द होने से बढ़ रहा खर्च
1 hr agoक्या हैं पुलिस बॉन्ड, कितने प्रकार के होते, उल्लंघन किया जाए तो क्या होगा?
1 hr agoकितना खतरनाक होगा बंगाल की खाड़ी में बन रहा चक्रवाती तूफान? कहां-कहां होगा
2 hrs ago'देखते ही प्यार...', कैसे हुई राजीव गांधी से पहली मुलाकात? सोनिया ने बताया
3 hrs agoक्या दिवाली से पहले नहीं होगा महंगाई भत्ते में इजाफा? सरकार कब करेगी ऐलान?
4 hrs agoइंस्टाग्राम के बाद सोनिया गांधी की X पर पहली पोस्ट, राजीव गांधी को किया याद
5 hrs agoकल लगेगी लोक अदालत, निपटाएं अपने पेंडिंग चालान
6 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines