India Buying Russian Oil: जुलाई में भारत ने रिकॉर्ड मात्रा में रूसी कच्चा तेल आयात किया. ऐसा पहली बार हुआ है जब रूस ने देश के कुल कच्चे तेल के आयात का आधे से ज्यादा हिस्सा सप्लाई किया है. कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म ‘केप्लर’ (Kpler) के अनुसार, भारत ने रूस से हर दिन लगभग 2.78 मिलियन बैरल तेल खरीदा, जबकि कुल आयात 4.96 मिलियन बैरल था. यूएई और सऊदी अरब भी बड़े सप्लायर बने रहे, लेकिन उनकी कुल सप्लाई रूस की तुलना में काफी कम थी.
अमेरिका की नजर में भारत
ये बढ़ोतरी ऐसे वक्त में हुई है जब अमेरिका एक ऐसे कानून पर विचार कर रहा है जिसके तहत बड़ी मात्रा में रूसी तेल और गैस आयात करने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. हालांकि, ये प्रपोज्ड उपाय अभी कानून नहीं बना है. अमेरिकी सीनेट में तो ये आगे बढ़ गया है, लेकिन इसे अभी ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ की मंज़ूरी की ज़रूरत है, जहां इसकी ज्यादा बारीकी से जांच होने की उम्मीद है. जब तक अंतिम कानून को लेकर स्थिति साफ नहीं हो जाती, तब तक भारतीय रिफाइनरों के पास अपनी मौजूदा खरीद रणनीति बदलने का कोई खास कारण नहीं है.
रशियन ऑयल में भारत की दिलचस्पी क्यों?
रूसी कच्चा तेल आर्थिक रूप से भी अट्रेक्टिव बना हुआ है. 2022 में ग्लोबल एनर्जी मार्केट में आए बदलावों के बाद से, रूसी तेल आम तौर पर किफायती कीमतों पर अवेलेबल रहा है. इससे भारतीय रिफाइनरों को लागत को मैनेज करने और सप्लाई को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली है. लंबे समय से चले आ रहे कारोबारी रिश्तों और पहले से बनी सप्लाई चेन ने इसकी अपील को और बढ़ाया है.
(Photo-X/@narendramodi)
वेस्ट एशिया टेंशन बड़ी वजह
रशियन इम्प्रोर्ट को बढ़ावा देने वाला एक और कारण मिडिल ईस्ट में हाल के जियोपॉलिटिकल टेंशन है. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ और ‘बाब अल-मंडेब स्ट्रेट’ में शिपिंग में रुकावट की चिंताओं ने वेस्ट एशिया से तेल की सप्लाई के लिए रिस्क और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ा दी है. इसकी तुलना में, रूस से आने वाले कच्चे तेल ने भारी अनिश्चितता के दौर में ज्यादा भरोसा दिलाया है.
तेल के कीमतों में गिरावट
हालांकि हाल के हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन रिफाइनर आम तौर पर सप्लाई की सुरक्षा और कीमत के आधार पर खरीद का फैसला काफी पहले ही कर लेते हैं. नतीजतन, कीमतों में थोड़े समय के उतार-चढ़ाव का भारत के आयात पैटर्न पर बहुत कम असर पड़ा है.
अब आगे क्या?
अगर अमेरिका का प्रपोज्ड कानून आखिरकार लागू हो जाता है, तो भारत अपनी सोर्सिंग रणनीति पर फिर से विचार कर सकता है और दूसरे प्रोड्यूसर्स से भी खरीद कर सकता है. हालांकि, फिलहाल रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बना हुआ है, जिसकी वजह किफायती कीमतें, भरोसेमंद अवेलेबिलिटी और पहले से बने हुए व्यापारिक रिश्ते हैं.
संबंधित खबरें
ज्ञानेश कुमार पर 2 करोड़ की रिश्वत का आरोप, केरल सरकार ने दिए जांच के आदेश
1 hr ago'अब जनसंख्या बढ़ने का डर...', चुनाव लड़ने को 2 बच्चों की शर्त पर SC का बयान
1 hr agoअग्निवीरों के लिए गुडन्यूज, 4 वर्ष से बढ़ाकर 6 साल किया गया कार्यकाल
1 hr agoसुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा राज्यों को अतिरिक्त सेल्स टैक्स लगाने का अधिकार
1 hr agoक्या भारत में तिरंगे के साथ फहरा सकते हैं दूसरा झंडा? जानें नियम और शर्तें
2 hrs agoआंध्र प्रदेश के निकाय चुनाव में NDA की बड़ी जीत, YSR कांग्रेस को झटका
2 hrs agoटोल टैक्स को लेकर NHAI का नया नियम, भविष्य में हाईवे पर नहीं लगेगा जाम
4 hrs agoश्रीनगर में भीषण आग का तांडव, 80 झुग्गियां जलकर खाक; दो की मौत
5 hrs agoदुष्कर्म का आरोपी जज पॉक्सो केस की कैसे कर सकता सुनवाई? SC ने लिया संज्ञान
5 hrs agoक्या 10वीं के बोर्ड एग्जाम में फेल होने से बचाएगा AI? जानिए CBSE का नया रूल
5 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines