Pakistan Occupied Kashmir: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को इस्लामाबाद आधिकारिक तौर पर ‘आजाद जम्मू और कश्मीर’ कहता है. इसका अपना प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, विधानसभा और यहां तक कि एक अलग झंडा भी है. फिर भी, इस इलाके के राजनीतिक सिस्टम को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं कि वहां की चुनी हुई सरकार के पास असल में कितनी ताकत है. इफ्तिखार अली गिलानी को PoK के पीएम के पद के लिए चुना गया है, जिससे इस इलाके के अनोखे प्रशासनिक ढांचे पर फिर से ध्यान गया है.
PoK का अपना प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति क्यों है?
इसका जवाब कश्मीर विवाद से गहराई से जुड़ा है. 1947 की भारत-पाकिस्तान जंग के बाद, पाकिस्तान ने पुरानी रियासत जम्मू और कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा बनाए रखा. इस इलाके को एक आम प्रांत के तौर पर शामिल करने के बजाय, इस्लामाबाद ने एक अलग राजनीतिक ढांचा बनाया. वक्त के साथ, PoK में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विधानसभा, अदालतें और अपना झंडा जैसी संस्थाएं बनीं. पाकिस्तान ने इस ढांचे का इस्तेमाल इस इलाके को देश के सीधे प्रशासन वाले हिस्से के बजाय एक सेल्फ गवर्निंग यूनिट के तौर पर दिखाने के लिए किया है. हालांकि आलोचकों का कहना है कि ये आजादी ज्यादातर कागजों पर ही है.
पाकिस्तान की रणनीति क्या है?
PoK को पाकिस्तान के फॉर्मल प्रोविंशियल स्ट्रक्चर से बाहर रखने से कश्मीर पर इस्लामाबाद की कूटनीतिक स्थिति को भी फायदा होता है. अगर इस इलाके को पूरी तरह से पाकिस्तान में मिला लिया जाता, तो इससे पूरे जम्मू और कश्मीर इलाके पर पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे दावे में मुश्किलें आ सकती थीं. अलग राजनीतिक सिस्टम पाकिस्तान को PoK को इंटरनेशनल लेवल पर एक ऑटोनॉमस टेरेटरी के तौर पर पेश करने की इजाजत देता है, जिसके लोगों की अपनी सरकार है.
PoK को असल में कौन चलाता है?
मुजफ्फराबाद में चुनी हुई संस्थाएं होने के बावजूद, पाकिस्तान के फेडेरल अथॉरिटी और सिविल मिलिट्री असिस्टेंस का बड़े राजनीतिक, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों पर काफी असर रहता है. ऐतिहासिक तौर पर 1949 के कराची समझौते जैसी व्यवस्थाओं ने रक्षा, विदेश मामलों और कम्यूनिकेशन जैसे अहम क्षेत्र पाकिस्तान को सौंप दिए थे. बाद में हुए संवैधानिक बदलावों ने स्थानीय संस्थाओं का दायरा तो बढ़ाया, लेकिन इस्लामाबाद के असर को पूरी तरह खत्म नहीं किया.
इससे एक बड़ा विरोधाभास पैदा होता है. PoK बाहर से एक अलग राजनीतिक इकाई जैसा दिखता है, जिसमें प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और झंडा सब कुछ है, जबकि पाकिस्तान अहम मामलों पर निर्णायक अधिकार बनाए रखता है. इसलिए क्रिटिक्स इस सिस्टम को इस्लामाबाद के लिए कंट्रोल बनाए रखने के एक तरीके के तौर पर देखते हैं, जबकि वो PoK को दुनिया के सामने एक आजाद या सेल्फ गवर्निंग रीजन के तौर पर पेश करता है.
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