Priyanka Gandhi On Cow Urine Expert: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने हाल ही में परीक्षा सुधारों पर केंद्र की नई समिति के गठन पर सवाल उठाए और इसके एक सदस्य को ‘गोमूत्र एक्सपर्ट’ कहा. माना जा रहा है कि ये कमेंट आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर प्रोफेसर वी कामाकोटी के बारे में थी, जिनके 2025 में गौमूत्र पर दिए गए बयानों ने देश भर में बहस छेड़ दी थी. इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली ये एक्सपर्ट कमेटी, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक की चिंताओं के बाद सुधारों की सिफारिश करने के लिए बनाई गई है.
कौन हैं प्रोफेसर वी कामाकोटी ?
प्रोफेसर वी कामाकोटी एक जाने-माने कंप्यूटर साइंटिस्ट और एकेडमिक हैं. उन्होंने आईआईटी मद्रास से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में अपनी मास्टर डिग्री और PhD पूरी की, 2001 में फैकल्टी मेंबर के तौर पर संस्थान से जुड़े और जनवरी 2022 में इसके डायरेक्टर बने.
उनकी रिसर्च कंप्यूटर आर्किटेक्चर, इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी और VLSI डिजाइन पर फोकस्ड है. वो आईआईटी मद्रास के माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम और इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी एजुकेशन एंड अवेयरनेस प्रोग्राम के हेड हैं. कामाकोटी ने भारत के पहले स्वदेशी इंडस्ट्रियल-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ (SHAKTI) के डेवलपमेंट को लीड भी किया. इसे रक्षा और संचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में इम्पोर्टेड चिप्स पर डिपेंडेंसी कम करने के लिए डिजाइन किया गया था.
पद्म श्री से सम्मानित
अपनी एकेडमिक जिम्मेदारियों के अलावा, उन्होंने नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड में काम किया है, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स की अध्यक्षता की है, और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की टेक्नोलॉजी कमेटियों से जुड़े रहे हैं. उन्होंने 150 से ज्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश किए हैं और उन्हें पद्म श्री (2026) सहित कई सम्मान मिले हैं.
गोमूत्र के बारे में क्या कहा था?
ये विवाद जनवरी 2025 का है, जब प्रोफेसर कामाकोटी ने चेन्नई में ‘माटू पोंगल’ कार्यक्रम को संबोधित किया था. अपने भाषण के दौरान उन्होंने देसी गायों और ऑर्गेनिक खेती पर बात की और कहा कि गोमूत्र में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और डाइजेस्टिव प्रॉपर्टीज होती हैं. उन्होंने एक धार्मिक साधु का किस्सा भी सुनाया, जिनका बुखार कथित तौर पर गोमूत्र पीने के बाद ठीक हो गया था.
कमेंट पर मचा था हंगामा
उनकी टिप्पणियों की विपक्षी नेताओं और साइंटिस्ट कम्यूनिटी के कुछ ग्रुप्स ने आलोचना की. उनका तर्क था कि सेहत से जुड़े ऐसे दावों के लिए इंसानों की तरफ से इस्तेमाल के लिए पर्याप्त क्लिनिकल सबूत नहीं थे. आलोचना का जवाब देते हुए प्रोफेसर वी कामाकोटी ने कहा कि गोमूत्र पर दिए गए कमेंट्स पब्लिश हुई रिसर्च पर बेस्ड थे. उनके समर्थकों का कहना था कि वो कोई मेडिकल सलाह या संस्थागत सिफारिशें नहीं दे रहे थे, बल्कि पारंपरिक तौर-तरीकों और अवेलेबल स्टडीज का जिक्र कर रहे थे.
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