राजनीति में अकसर बड़े नाम और खासकर पुराने लोग ही चर्चा में बने रहते हैं, लेकिन कभी-कभी कोई ऐसा शख्स भी सामने आता है जिसकी कहानी अलग ही प्रेरणा देती है. अशोक मित्तल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. बता दें कि अशोक मित्तल बेहद ही साधारण परिवार से हैं और शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है. इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और उन्हें अहम जिम्मेदारी मिली है.
बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटाकर उनकी जगह पंजाब से राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी है. आम आदमी पार्टी ने इस फेरबदल के संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेजकर सूचित कर दिया है. अब से डॉ. अशोक मित्तल राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता होंगे. डॉ. अशोक मित्तल पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों में गिने जाते हैं. वे 'लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी' (LPU) के चांसलर भी हैं.
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मिठाई की दुकान से राजनीति तक का सफर
अशोक मित्तल का जन्म पंजाब के जालंधर में हुआ था. उनके पिता ने लवली स्वीट्स नाम से छोटा सा मिठाई का कारोबार शुरू किया था. अशोक मित्तल ने अपने भाइयों के साथ इस काम में हाथ बंटाया. लेकिन उनका सपना कुछ बड़ा करने का था. धीरे-धीरे उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा और 2005 में लवली प्रोफेशनल युनिवर्सिटी की स्थापना की, जो आज देश की सबसे बड़ी निजी यूनिवर्सिटीज में गिनी जाती है.
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उन्होंने कानून की पढ़ाई गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से की. इसके बाद शिक्षा क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने एक ऐसा संस्थान खड़ा किया जहां हजारों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. उनकी सोच हमेशा से यही रही कि शिक्षा के जरिए समाज को कुछ वापस किया जाए. यही वजह है कि LPU आज राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना चुका है.
इसके अलावा अशोक मित्तल का सफर सिर्फ बिजनेस या शिक्षा तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने अपने काम के जरिए लाखों युवाओं को रोजगार और बेहतर अवसर दिलाने में भी मदद की. उनकी यूनिवर्सिटी में अलग-अलग क्षेत्रों की पढ़ाई होती है और यहां से पढ़े छात्र देश-विदेश में काम कर रहे हैं.
राजनीति में आने के बाद भी उनका फोकस वही रहा शिक्षा, रोजगार और विकास. AAP से जुड़कर उन्होंने पंजाब में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई. 2022 में वे राज्यसभा पहुंचे और संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी. उनकी छवि एक शांत, व्यावहारिक और विकास पर ध्यान देने वाले नेता की रही है.